पोरा तिहार पर निकली भोजली विसर्जन यात्रा, ग्राम देवी-देवताओं के स्थानों पर की पूजा-अर्चना
अर्जुनी। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पोला एवं भोजली पर्व का अर्जुनी सहित आसपास के गांवों में श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ।लोकपर्व पोला त्यौहार के अवसर पर गांव में बोई गई भोजली का ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ विसर्जन किया। भोजली विसर्जन के दौरान गांव का माहौल भक्तिमय और उत्सवमय रहा।
इस पर्व के अवसर पर ससुराल से मायके पहुंची बेटियों ने पोरा पटकने की परंपरा निभाते हुए रावण भाठा में पोला पटक। इससे पर्व की रौनक और बढ़ गई। महिलाओं और ग्रामीणों ने जसगीत तथा भोजली गीत गाते हुए पारंपरिक तरीके से भोजली विसर्जन यात्रा निकाली। भोजली गीतों की गूंज से पूरा गांव लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
भोजली विसर्जन यात्रा गांव के बजरंग चौक होते हुए गांव की विभिन्न गलियों व शक्तिपीठों से निकली। इस दौरान ग्रामीणों ने ग्राम देवी-देवताओं के स्थानों पर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने गांव में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। जगह-जगह पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना के बाद भोजली विसर्जन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। गली भ्रमण और पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीण मां भोजली को लेकर महामाया मंदिर स्थित रामसागर तालाब पहुंचकर यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ भोजली का विसर्जन किया गया। इस दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने भोजली गीत गाकर मां भोजली को भावपूर्ण विदाई दी।
भोजली पर्व के माध्यम से अर्जुनी में एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता की सुंदर झलक देखने को मिली। पूरे आयोजन में ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बना और भक्ति व उमंग का माहौल देर तक बना रहा।








