ओवरलोड वाहनों से वसूली करने वाला आरक्षक अर्जुन दुबे बर्खास्त, दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच

दुर्ग। दुर्ग जिले में पुलिस विभाग ने भ्रष्टाचार के मामले में सख्त कदम उठाते हुए रक्षित केंद्र में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 597 अर्जुन दुबे को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, आरक्षक अर्जुन दुबे की भर्ती वर्ष 2011 में हुई थी। पदस्थापना के दौरान वह यातायात विभाग में ड्यूटी करता था। इसी दौरान उस पर आरोप लगा कि वह ओवरलोड माल वाहक वाहनों से नियमित रूप से अवैध वसूली करता था। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी आरक्षक ने वाहन चालकों से ओवरलोडिंग के नाम पर पैसे की वसूली ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए भी कराई थी। इस संबंध में प्राप्त शिकायतों पर विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान आरोपी आरक्षक के खिलाफ पेश किए गए सबूतों और लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में पुष्टि की कि अर्जुन दुबे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनैतिक तरीके से धन वसूली की है।  जांच रिपोर्ट मिलने के बाद 8 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजय अग्रवाल ने आरक्षक अर्जुन दुबे को सेवा से पृथक कर बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार या वसूली जैसी गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। विभाग की साख और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिसकर्मियों को ईमानदारी और अनुशासन के साथ जनता की सेवा करनी चाहिए, अन्यथा उनके  खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसी कार्रवाई के क्रम में एसएसपी ने सुपेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्मृति नगर पुलिस चौकी में तैनात एएसआई प्रमोद सिंह और सिपाही रवि ठाकुर को भी लाइन अटैच किया है। दोनों पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगे थे। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा यह कार्रवाई पूरे जिले में एक संदेश देने के उद्देश्य से की गई है कि कोई भी कर्मचारी यदि अपने कर्तव्य से भटकता है या भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय नागरिकों ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पुलिस विभाग की साख में सुधार होगा। विभागीय स्तर पर यह कार्रवाई भविष्य में अन्य पुलिसकर्मियों के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।

 

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