कवर्धा। कबीरधाम पुलिस ने लंबे समय से चल रहे सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग के काले कारोबार का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने मुख्य आरोपी महिला अमीना ताज और उसके सहयोगी राकेश साहू को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर जरूरतमंद लोगों को मोटे ब्याज पर रकम देकर कई गुना पैसा वसूलने, ब्लैंक चेक के सहारे धमकाने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस को एक प्रार्थी ने शिकायत दी थी कि उसने अमीना ताज से 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था। लेकिन इसके बदले उससे करीब 6 लाख रुपये वसूल लिए गए। इसके बाद भी आरोपी ने ब्लैंक चेक और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर लगातार प्रताड़ित किया। अमीना ताज खुद को पुलिस में ऊंची पहुंच वाली बताती थी। वह लोगों को धमकाती थी कि अगर उन्होंने विरोध किया तो उनके आवेदन तक दर्ज नहीं होंगे। इस पूरे खेल में उसका सहयोगी राकेश साहू भी सक्रिय था, जो घर-घर जाकर जबरन वसूली करता और मारपीट कर लोगों में आतंक फैलाता था। वायरल ऑडियो से बढ़ा मामला हाल ही में एक वायरल ऑडियो सामने आया, जिसमें अमीना ताज पीड़ित को धमकाती हुई सुनी गई। इस ऑडियो ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया। दबिश के दौरान आरोपियों के घर और कार्यालय की तलाशी ली गई। पुलिस ने छापेमारी में उधारी लेन-देन के कागजात, पीड़ितों के ब्लैंक चेक, रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। इसके अलावा अन्य चार पीड़ितों की शिकायतें भी जांच में शामिल की गई हैं। यह कार्रवाई एसपी धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन और एएसपी पुष्पेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस टीम द्वारा की गई। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि किसी अपराधी की यह धमकी कि “पुलिस उसका कुछ नहीं कर सकती” पूरी तरह निराधार है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मामले में दर्ज दस्तावेजों और ब्लैंक चेक की जांच आगे की कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। आम जनता से अपील कबीरधाम पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे अवैध सूदखोरों से कर्ज न लें। जरूरत पड़ने पर केवल बैंकों या सहकारी संस्थाओं से ही ऋण प्राप्त करें। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामले सामने आने पर तुरंत शिकायत करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके। सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग जैसे अपराध लंबे समय से आम जनता को जकड़े हुए हैं। गरीब और जरूरतमंद लोग तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अवैध रूप से चल रहे इन कर्ज जाल में फंस जाते हैं। इसके बाद उनसे कई गुना राशि वसूली जाती है, जिससे वे आर्थिक और मानसिक रूप से टूट जाते हैं। अमीना ताज का मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां लोगों की मजबूरी को हथियार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया गया। उसके सहयोगी राकेश साहू ने इस खेल को और हिंसक बना दिया था, जिससे लोग खुलकर शिकायत तक नहीं कर पाते थे।





