रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि निर्धारण (Land Classification) के संबंध में नए आदेश जारी किए हैं। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में कुल 13 बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिसमें नगर निगम क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि के रेट निर्धारित किए गए हैं। इस आदेश का उद्देश्य भूमि उपयोग की पारदर्शिता बढ़ाना और भूमि मूल्य निर्धारण को मानकीकृत करना बताया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, यदि किसी कृषि भूमि का उपयोग अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है—जैसे आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक—तो उसे “डायवर्टेड” भूमि माना जाएगा। इसके तहत धारा 258 की उपधारा के अनुसार भूमि का पुनः निर्धारण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में भूमि के लिए नया मूल्य और प्रीमियम दर तय की जाती है। राजस्व विभाग ने बताया कि भूमि डायवर्ट करने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। डायवर्टेड भूमि पर प्रीमियम की दर में भी बदलाव किया गया है, ताकि भूमि मूल्य सरकार के निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम सीमा, ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के रेट अलग-अलग होंगे। नगर निगम क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि का मूल्य अधिक होगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह अपेक्षाकृत कम रहेगा। औद्योगिक क्षेत्र में भूमि का मूल्य उद्योग स्थापना और उत्पादन क्षमता के आधार पर तय किया जाएगा।राजस्व विभाग का यह भी कहना है कि भूमि निर्धारण में बदलाव से निवेशकों, व्यवसायियों और किसानों को स्पष्ट दिशा मिलेगी। यह कदम भूमि विवाद कम करने, भूमि उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद करेगा। सरकार ने आम जनता, निवेशकों और भूमि मालिकों को निर्देश दिया है कि वे भूमि डायवर्ट करने या नए प्रोजेक्ट के लिए भूमि खरीदने से पहले नवीनतम आदेश और प्रीमियम दरों की जानकारी प्राप्त करें। इससे किसी प्रकार की विवाद या वित्तीय परेशानी से बचा जा सकेगा। इस आदेश से यह भी स्पष्ट होता है कि कृषि भूमि का अवैध उपयोग रोकने और भूमि नीति को प्रभावी बनाने के लिए सरकार सजग है। भूमि मालिकों और डेवलपर्स को निर्देश दिया गया है कि वे भूमि उपयोग के नियमों का पालन करें और निर्धारित प्रीमियम का भुगतान समय पर करें।





