डोंगरगांव:सीजर ब्लेड तक नहीं अस्पताल में, पोस्टमार्टम के लिए परिजनों से मंगवाया औजार

बगदई की आत्महत्या प्रकरण ने खोली डोंगरगांव सीएचसी की पोल

डोंगरगांव।सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही एक बार फिर डोंगरगांव में सामने आई है। बगदई गांव की एक महिला के आत्महत्या किए जाने के बाद, जब उसका शव पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) डोंगरगांव लाया गया, तो वहां बुनियादी चिकित्सा उपकरणों का अभाव देखने को मिला। पोस्टमार्टम के लिए जरूरी सीजर ब्लेड और ग्लव्स तक अस्पताल में मौजूद नहीं थे — और शर्मनाक रूप से अस्पताल प्रबंधन ने यह समान मृतका के परिजनों से मंगवा लिया।

घटना बगदई निवासी ममता निषाद की है, जिसने पारिवारिक विवाद से आहत होकर जहर खा लिया। परिजनों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सीएचसी भेजा।

अस्पताल में फैला अव्यवस्था का मंजर

जब शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा, तब हकीकत सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सीजर ब्लेड और अन्य जरूरी औजार उपलब्ध नहीं हैं, और मृतिका के पड़ोसी राम निषाद और परिजनों ने एजी खबर से बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने कहा गया कि वे पास की मेडिकल दुकान से ये सामग्री लेकर आएं। परिजनों ने मजबूरी में सामान लेकर आए।

320 रुपये की सामग्री नहीं, पर 19 लाख की सालाना कमाई

डोंगरगांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सालाना 19 लाख रुपये की आय करता है। यह राशि जीवनदीप समिति शुल्क, लैब जांच, एक्सरे और आयुष्मान योजना से इलाज के एवज में प्राप्त होती है। इसके अलावा राज्य सरकार से भर्ती मरीजों के इलाज के लिए अलग बजट भी सीधे अस्पताल को मिलता है।

ये मंगवाए समान

– दो दस्ताने, एक सर्जिकल ब्लेड, शव पैकिंग झिल्ली और डिब्बा

2 लाख आबादी पर बोझ, लेकिन सुविधाएं नदारद

सरकारी मापदंडों के अनुसार, एक सीएचसी 80,000 से 1.2 लाख आबादी के लिए होता है। मगर डोंगरगांव का सीएचसी करीब 2 लाख लोगों की जिम्मेदारी संभाल रहा है। इसके अधीन 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 32 सब-सेंटर आते हैं।

जिम्मेदार का ये है कहना

मैं अभी हाई कोर्ट आया हूं, इस विषय की मुझे जानकारी नहीं है। पता करता हूं।

डॉ.नेत राम नवरतन

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राजनांदगांव

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