डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर डोंगरगांव का स्वास्थ्य रिपोर्ट कार्ड विफलताओं से भरा हुआ है। 25 साल बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दशा सुधरने के बजाय और बिगड़ी है। हालत यह है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए अब जैन भवन में अस्थायी स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने जा रहे हैं।
13 सितंबर को सदर लाइन स्थित जैन भवन में विशेषज्ञ डॉक्टर तो आएंगे, लेकिन इलाज आधा-अधूरा ही रहेगा। वजह यह है कि अस्पताल की आधी मशीनें बंद हैं और जो मशीनें चालू हैं, उन्हें शिविर स्थल तक ले जाना संभव नहीं। एक्स-रे, खून की जांच, आंखों की जांच के लिए जरूरी फोरोप्टर और ईएनटी उपकरण मौके पर उपलब्ध नहीं होंगे। नतीजा यह होगा कि डॉक्टर केवल फौरी तौर पर मरीज देखकर लौट जाएंगे।
शिविर में ये होंगे विशेषज्ञ डॉक्टर
डॉ. बी.के. बनर्जी – मनोरोग विशेषज्ञ
डॉ. अनिल महाकालकर – अस्थि रोग विशेषज्ञ
डॉ. बी.एल. तुलावी – ईएनटी विशेषज्ञ
डॉ. खुमान सिंह मांडवी – मेडिसिन विशेषज्ञ
डॉ. भानु प्रिया चौधरी – नेत्र रोग विशेषज्ञ
डॉ. निधि गजभिए – स्त्री रोग विशेषज्ञ
बीएमओ का टालमटोल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव की बी एम ओ डॉ. रागिनी ने सफाई दी—
“पिछले शिविर में समस्या हुई थी, इसलिए जैन भवन में आयोजन कर रहे हैं। एजी खबर ने कहा कि नया अस्पताल उच्च मानकों से तैयार है, जिसमें ओपीडी के पांच रूम हैं। लेकिन बी एम ओ ने बारिश की संभावना का बहाना बनाते हुए कहा कि बारिश को देखते हुए अस्थायी स्वास्थ्य शिविर भवन में करवा रहे हैं।”
यह होंगी मुश्किलें
मौके पर डॉक्टर सीबीसी और अन्य जांच तत्काल नहीं कर पाएंगे।
एक्स-रे, ईएनटी और नेत्र जांच अधूरी रहेगी।
मरीजों को सिर्फ प्रारंभिक परामर्श मिलेगा।
नेताओं की चुप्पी
अस्पताल की बदहाली पर जनप्रतिनिधि खामोश हैं। रोजाना नेतागिरी और मंचीय भाषण करने वाले नेता और उनके समर्थक इस मुद्दे पर एक शब्द बोलने को तैयार नहीं। जनता को एक बार फिर केवल औपचारिकताओं का झुनझुना थमा दिया गया है।
अधिकारी के इस तरह के रवैये से सरकार की छवि धूमिल होगी।





