डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।मारगांव हत्याकांड ने पुलिस की सतर्कता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नवदुर्गा के समय का संभावित विवाद की जानकारी पुलिस को पहले ही टेलीफोन पर दी गई थी, लेकिन थाने से कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की इस उदासीनता का नतीजा यह हुआ कि विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और आखिरकार एक व्यक्ति की जान चली गई।
रविवार को ग्राम मारगांव निवासी आंगेश्वर साहू (40 वर्ष) की हत्या उसके पड़ोसी महेश सिन्हा ने कर दी।
आरोपी वही व्यक्ति है जिसने करीब डेढ़ माह पहले एक महिला के घर के बाहर “माता लक्ष्मी के पदचिह्न” बनाकर चमत्कार और अंधविश्वास की अफवाह फैलाई थी। मृतक ने इस छल का खुलकर विरोध किया था, जिसके बाद दोनों के बीच तनातनी गहराती चली गई।
गांव की बैठक में किस आधार पर लगाया जुर्माना
ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी और संबंधित महिला के अवैध संबंधों की बात सामने आने पर गांव में बैठक हुई, जिसमें दोनों जुर्माना लगाया गया।
महेश पर ₹51 हजार और महिला पर 21 हजार।जिसमें महेश ने ₹10 हजार नगद, और महिला ने ₹7 हजार जमा किए।
विशेषज्ञ की राय
हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभय तिवारी ने कहा —
“गांव के लोगों को किसी पर जुर्माना लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह पूर्णतः गैरकानूनी है और पुलिस को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
ग्रामीणों ने भी यही कहा कि —
“अगर पुलिस ने समय रहते कदम उठाया होता, तो जान नहीं जाती।”
“नव दुर्गा के समय संवेदनशील या सामाजिक विवाद से जुड़े मामलों में थाना प्रभारी को स्वयं जाकर स्थिति का निरीक्षण करने के निर्देश मैंने दिए थे।
—मोहित गर्ग, पूर्व पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव
तात्कालिक रूप में हत्या के केस में लव ट्रायंगल मिला है। यदि विवाद नवदुर्गा के समय का है तो उस विषय में भी पता करवाऊंगी।
—अंकिता शर्मा
पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव





