Wednesday, February 25, 2026
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    प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, साहित्य जगत में शोक

    रायपुर। छत्तीसगढ़ और हिन्दी साहित्य जगत के लिए मंगलवार की शाम बेहद शोकपूर्ण रही, जब प्रख्यात कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

    कुछ ही दिन पहले विनोद कुमार शुक्ल को भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। यह सम्मान उनके लगभग नौ दशक लंबे रचनात्मक जीवन और हिन्दी साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान की औपचारिक स्वीकृति था। दुर्भाग्यवश, यह सम्मान प्राप्त करने के कुछ समय बाद ही उनका देहावसान हो गया।

    1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिन्दी साहित्य के ऐसे रचनाकार थे, जो मंचों पर बहुत धीमे और कम बोलते थे, लेकिन उनकी साहित्यिक आवाज़ बेहद दूर तक सुनाई देती थी। वे उन लेखकों में थे जिन्होंने शोर, घोषणाओं और आडंबर से दूर रहकर साहित्य को एक गहरी मानवीय संवेदना दी।

    उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने मध्यमवर्गीय, साधारण और लगभग अनदेखे जीवन को अपनी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों का केंद्र बनाया। उनके यहाँ एक साधारण कमरा, खिड़की, पेड़, घास का टुकड़ा या एक चुप्पी भी पूरे ब्रह्मांड में बदल जाती है। उनकी भाषा में शोर नहीं, बल्कि गहरी शांति और भीतर तक उतरने वाली संवेदना है।

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