Saturday, February 21, 2026
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    प्राकृतिक कृषि की प्रेरणास्रोत *डॉ. आरती साठे जी* : देश-विदेश में छत्तीसगढ़ का नाम किया रोशन

    रायपुर (गजेंद्र साहू) । समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली डॉ. आरती साठे आज पूरे देश में एक प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।मेडिकल की पढ़ाई और एनाटॉमी की सहायक प्राध्यापिका रायपुर मेडिकल कॉलेज में रही इसी के साथ-साथ समाजशास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट रहते हुए उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है।

    पिछले 15 वर्षों से जैविक कृषि और बागवानी के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. साठे न केवल एक अरोमा प्लांट एक्सपर्ट हैं, बल्कि राष्ट्रीय बांस मिशन की प्रमाणित प्रशिक्षक और बायो-एंजाइम एंटरप्रेन्योर्स एकेडमी (BEA, इंडिया) की फैकल्टी सदस्य भी हैं।

    प्रशिक्षण कार्यशालाओं का देशव्यापी प्रभाव

    अब तक भारतभर में 1415 से अधिक सफल कार्यशालाओं का आयोजन कर चुकीं डॉ. साठे ने मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात से लेकर भूटान और असम के वन क्षेत्रों तक में प्राकृतिक कृषि, औषधीय पौधे और बांस की खेती पर प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने 1.5 लाख से अधिक किसानों को रसायन मुक्त खेती और विपणन के लिए प्रशिक्षित किया है।

    वन विभाग व उद्यानिकी विभाग के सहयोग से 2.5 लाख से अधिक औषधीय पौधों का रोपण उनके द्वारा किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वन क्षेत्रों के लोगों को पौधारोपण, नर्सरी निर्माण, खाद निर्माण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे विषयों पर रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया है।

    संघ के माध्यम से सामाजिक सेवा

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण प्रकोष्ठ के तहत वे वर्ष 2020 से सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। छत पर बागवानी, कचरा प्रबंधन, हरित गृह आदि विषयों पर वे कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में 4,000 से अधिक पौधों का नि:शुल्क वितरण एवं कपड़ों के थैलों का वितरण किया है।

    संघ कार्यालय रायपुर में भी लक्ष्मी तरु जैसे औषधीय पौधों का सामूहिक रोपण किया गया। महिला समूहों को देशी गाय सेवा, प्राकृतिक कृषि और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

    डॉ. साठे की विशेषज्ञता को अमेरिका तक में सराहा गया है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में उनके नेतृत्व में कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों, ग्रह-नक्षत्रों और सूर्य किरणों के प्रभाव से कृषि पर आधारित प्रशिक्षण दिया गया।

    उन्होंने देशी बीजों के संरक्षण व उपयोग पर भी विशेष कार्यशालाएं कीं और G-20 सम्मेलन वर्ष 2023 में उन्हीं के संग्रहित बीजों को प्रमुखता से चुना गया।

    सरकारी योजनाओं से भी जुड़ाव

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के अंतर्गत डॉ. साठे ने ओडिशा और मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट कार्य किया है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरणा मिली है।

    डॉ. आरती साठे की प्रतिबद्धता और कार्यों की बदौलत आज जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को नई दिशा मिल रही है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की वे एक गौरवशाली प्रतिनिधि बन चुकी हैं।

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