तखतपुर। शासकीय प्राथमिक शाला उमरिया में बच्चों को पढ़ाने के बजाय शिक्षक का सोते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में शिक्षक आराम से स्कूल के कमरे में सोते दिखाई दे रहे हैं, जबकि छोटे बच्चे पढ़ाई करने के बजाय सफाई और अन्य कार्य करते नजर आ रहे हैं। इस घटना से अभिभावक और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों से पढ़ाई कराने के स्थान पर स्कूल में इस तरह की गतिविधि शिक्षा के अधिकार और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वीडियो में दिख रही स्थिति को लेकर लोगों ने तुरंत कार्रवाई और दोषी शिक्षक पर निलंबन की मांग की है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कामेश्वर बैरागी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच टीम गठित कर दी है। जांच टीम को तीन दिवस के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बीईओ ने कहा कि वीडियो में दिख रहे तथ्य बेहद चिंताजनक हैं और यदि जांच में शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरपंच मधु कौशिक ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की और कहा कि विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि शिक्षक का अध्यापन समय में सोना न केवल शिक्षकीय मर्यादा का उल्लंघन है बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। सरपंच ने स्कूल जाकर स्वयं निरीक्षण करने और मामले की शिकायत ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से करने का निर्णय लिया। सरपंच ने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत भविष्य में विद्यालय की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखेगी। अभिभावकों के साथ बैठक कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपाय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ग्रामीण और अभिभावक इस घटना को शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर चोट बताते हुए कड़े प्रावधान लागू करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपेक्षा जताई कि इस मामले में त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाएं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने बच्चों के अधिकार, सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना प्राथमिक शिक्षा में निरीक्षण और जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से उजागर करती है, और शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी स्वरूप है कि स्कूलों में नियमित निगरानी और बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।





