डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)। एक अनजान चेहरा! जिसकी पहचान जिंदगी में भी नहीं हो पाई और मौत के बाद भी कोई उसे अपना कहने नहीं आया। 5 दिन तक अस्पताल में उसका निर्जीव शरीर अपनों का इंतजार करता रहा, लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा, तब डोंगरगाँव पुलिस ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए उसे सम्मानजनक विदाई दी।
ग्राम अर्जुनी से गंभीर हालत में मिले इस अज्ञात व्यक्ति को डायल 112 की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया था। शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, राजनांदगांव में इलाज के दौरान 11 मार्च 2026 को उसकी सांसें थम गईं। इसके बाद अस्पताल और पुलिस को उम्मीद थी कि शायद कोई परिजन, कोई पहचान वाला उसे लेने आएगा लेकिन हर गुजरते दिन के साथ ये उम्मीद भी टूटती गई।
पुलिस ने हार नहीं मानी। आसपास के थानों, सरहदी जिलों, सोशल मीडिया और गुमशुदगी रिकॉर्ड में उसकी पहचान तलाशने की हरसंभव कोशिश की गई। लेकिन वह अंत तक ‘अज्ञात’ ही रहा—एक ऐसा नाम, जिसे कोई पुकारने वाला नहीं था।
आखिरकार, जब कोई अपना नहीं आया, तो पुलिस ही उसका सहारा बनी। चिखली मुक्तिधाम में पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ उसका कफन-दफन किया गया। उस अनजान इंसान को वो इज्जत दी गई, जो हर इंसान की अंतिम हक होती है।
इस संवेदनशील पहल में प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य कुमार, निरीक्षक आशीर्वाद रहटगंवाकर ,प्रधान आरक्षक संदीप देशमुख और आरक्षक ओंकार कुर्रे ने सिर्फ ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी होता है।





