मंत्री राजेश अग्रवाल का आठवीं पास ‘निज सहायक’ अटक गया — नियमों ने दिखाई 12वीं की दीवार

(दीपक अवस्थी) ।छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस — क्या “निष्ठा” ज्यादा जरूरी है या “शैक्षणिक योग्यता”?

कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल के प्रिय तबरेज आलम की नियुक्ति पर यही सवाल मंडरा रहा है।

मंत्रीजी ने सोच लिया — “जो सालों से साथ है, वही सबसे योग्य है।”

बस फिर क्या था, आदेश हुआ कि तबरेज आलम को निज सहायक बना दिया जाए।

लेकिन बीच में अड़ गया “सामान्य प्रशासन विभाग” — वही विभाग जो आजकल नियम पुस्तिका को सिर्फ शोपीस नहीं, बल्कि कभी-कभी पढ़ भी लेता है।

पत्र भेजा गया:

“मान्यवर, निज सहायक पद के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास है।

तबरेज आलम मात्र आठवीं पास हैं। अतः आदेश पर अमल संभव नहीं।”

अब बेचारे तबरेज आलम क्या करें?

पद सामने है, लेकिन रास्ते में अड़ गई चार क्लास की दूरी!

अगर विभाग थोड़ा “संवेदनशील” होता, तो कह देता — “आठवीं पास दिल और बारहवीं पास भरोसा पर्याप्त है।”

वैसे देखा जाए तो मंत्रीजी के निज सहायक के काम में 12वीं पास की कौन सी थ्योरी लगनी है?

“फाइल लाओ”, “चाय दो”, “मंत्रीजी मीटिंग में हैं” — ये सब तो अनुभव आधारित शिक्षा से भी हो सकता है।

पर अफसोस, इस बार “निष्ठा” को हराया “नियमों” ने।

राजनीति में योग्यता की जरूरत नहीं होती, पर सचिवालय सेवा में अब भी डिग्री की दीवार बाकी है।

 

 

 

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