रायपुर। माता कौशल्या धाम, चंदखुरी में शीघ्र ही भगवान श्री राम की 51 फीट ऊँची भव्य वनवासी स्वरूप प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा तीन दिन पहले ग्वालियर से रवाना हुई थी और अब रायपुर की सीमा पर स्थित सिलतरा तक पहुँच चुकी है। प्रतिमा के परिवहन में ड्राइवर ने बताया कि दिन के समय भारी वाहनों की नो एंट्री के कारण वाहन फंस गया था। रात में नो एंट्री खुलने के बाद प्रतिमा चंद्रखुरी पहुँच जाएगी। यह भव्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई है। ग्वालियर स्थित सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में महीनों की कठिन साधना और उत्कृष्ट शिल्प कौशल के माध्यम से यह प्रतिमा तैयार की गई है। प्रतिमा भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। प्रतिमा में भगवान श्रीराम के वनवासी स्वरूप को दर्शाया गया है। इसमें भगवान धनुष-बाण धारण किए दिखाई देंगे और वे संयम, त्याग और मर्यादा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत होंगे। विशेष रूप से इसे मजबूत और टिकाऊ ‘सेंड मिंट स्टोन’ से निर्मित किया गया है, जिससे यह प्रतिमा लंबे समय तक सुरक्षित और आकर्षक बनी रहे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे श्रीराम वनगमन पथ परियोजना के अंतर्गत पूर्व में भी दो भव्य प्रतिमाएं स्थापित कराई गई थीं। इनमें प्रमुख हैं शिवरीनारायण मंदिर और सीता रसोई। इन स्थलों पर स्थापित प्रतिमाओं की कलात्मकता और आकर्षण को देखते हुए 51 फीट ऊँची नई प्रतिमा का निर्माण दीपक विश्वकर्मा को सौंपा गया। चंद्रखुरी को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि माता कौशल्या का मायका यही स्थित है। इस स्थल पर पहले से स्थापित श्रीराम प्रतिमा के स्थान पर अब यह नई विराट प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस प्रतिमा की स्थापना से चंद्रखुरी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभरेगा। राज्य सरकार द्वारा श्रीराम वनगमन पथ परियोजना के तहत ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस भव्य प्रतिमा की स्थापना से छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा और श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। प्रतिमा के आगमन और स्थापना के बाद क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति और श्रद्धालु मिलकर स्थापना कार्यक्रम को भव्य रूप देने की तैयारी में हैं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त पहल से यह स्थल आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन जाएगा।





