गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हेलीकॉप्टर आज निर्धारित प्रोटोकॉल के स्थान के बजाय अचानक दूसरी जगह लैंड हो गया, जिससे जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस असामान्य लैंडिंग के कारण अफसरों के हाथ-पांव फूल गए और सुरक्षा व्यवस्था में तुरंत सक्रियता दिखानी पड़ी। हेलीकॉप्टर के निर्धारित स्थान से हटकर लैंड करने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अरपा महोत्सव और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के छठवें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रमों के बाद उनका नाइट हॉल्ट गौरेला में तय किया गया था। प्रोटोकॉल के अनुसार उनका हेलीकॉप्टर पेंड्रा हेलीपैड में उतरना था। लेकिन हेलीकॉप्टर पेंड्रा की बजाय गौरेला गुरुकुल स्कूल में बनाए गए अस्थायी हेलीपैड में उतर गया। हेलीकॉप्टर के अनियोजित लैंडिंग की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के अफसर दौड़ते हुए गुरुकुल हेलीपैड पहुंचे। बताया गया कि लगभग 10 मिनट तक हेलीकॉप्टर वहीं खड़ा रहा, जिसके बाद पायलट ने इसे पेंड्रा हेलीपैड तक उड़ाया और मुख्यमंत्री सुरक्षित रूप से हेलीकॉप्टर से नीचे उतरे। सुरक्षा के लिहाज से इस घटना को बड़ी चूक माना जा रहा है। इससे प्रशासन में सुरक्षा इंतजामों और पायलट के निर्णय प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग स्थान बदलने की जानकारी सुरक्षा और जिला प्रशासन को पहले से मिलती है ताकि आवश्यक तैयारी की जा सके। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों ने बताया कि संभवत: पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच मिस कम्युनिकेशन के कारण हेलीकॉप्टर ने तय हेलीपैड की बजाय अस्थायी हेलीपैड में लैंड किया। हालांकि मौसम साफ था और कोई इमरजेंसी जैसी स्थिति नहीं थी। इससे यह स्थिति और अधिक चौंकाने वाली बन गई। यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में समस्या आई हो। अक्सर खराब मौसम या रात होने की वजह से इमरजेंसी लैंडिंग की जाती है। लेकिन इस बार अचानक तय स्थान से हटकर लैंडिंग और प्रशासनिक अफसरों की तत्परता ने सुरक्षा व्यवस्था में कमियों को उजागर कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय और जिला प्रशासन इस मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में पायलट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और जिला प्रशासन के कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह घटना गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि किसी भी प्रकार की देरी या मिस कम्युनिकेशन सुरक्षा खतरों को जन्म दे सकती थी। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता और जिला प्रशासन की तत्परता पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने अभी तक घटना के औपचारिक कारण और जिम्मेदारियों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।



