राजिम: छत्तीसगढ़ के ‘प्रयाग’ राजिम में आयोजित कुंभ कल्प मेला इस समय आस्था और आध्यात्म का अद्भुत केंद्र बना हुआ है। देश भर से आए अखाड़ों के नागा साधु और संत श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस बार राजिम कुंभ में सबसे खास आकर्षण बाल साधु और युवा नागा संत बने हैं.
12 साल के रेवा गिरी महाराज ने खींचा ध्यान
खबरों के मुताबिक, राजिम कुंभ में जूना अखाड़े से जुड़े 12 साल के बालक साधु रेवा गिरी महाराज पहुंचे हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और श्रद्धा का विषय हैं. नरसिंहपुर जिले के रहने वाले यह बालक धर्म की रक्षा के लिए बहुत कम उम्र में ही संन्यासी जीवन अपनाकर नागा परंपरा की ओर बढ़ चले हैं.
नागा साधुओं का शक्ति प्रदर्शन और आस्था
राजिम कुंभ में विभिन्न क्षेत्रों से करीब 7 अखाड़ों के नागा साधु-संत पहुंचे हैं.
इन साधुओं का त्रिवेणी संगम (महानदी, पैरी और सोंदूर) में स्नान और भक्ति प्रदर्शन श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है.
यह नागा संत तप, साधना और सांसारिक मोह-माया त्याग कर सनातन धर्म की रक्षा के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं.
कठिन साधना की राह
बताया जा रहा है कि इतनी कम उम्र में सांसारिक जीवन त्याग कर भक्ति में लीन होना और कठिन तपस्या करना अपने आप में अद्भुत है। हालांकि, नागा साधु बनने की पूर्ण दीक्षा और प्रक्रिया बहुत कठिन होती है, जिसमें कई वर्षों की कड़ी परीक्षा शामिल है.
राजिम कुंभ में इन बाल साधुओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है।



