Thursday, February 26, 2026
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    रायपुर में चल रहे हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नव्या मालिक और विधि अग्रवाल की रिमांड 14 दिन और बढ़ाने की मांग की है

    रायपुर । राजधानी रायपुर के बहुचर्चित ड्रग्स मामले में पुलिस को एक और बड़ी कार्रवाई करने का मौका मिल सकता है। इस हाई-प्रोफाइल केस की मुख्य आरोपी नव्या मालिक और विधि अग्रवाल की रिमांड बढ़ाने की मांग पुलिस ने अदालत में की है। पुलिस का कहना है कि जांच को आगे बढ़ाने और ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। अदालत ने पुलिस की अर्जी पर सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन फैसला अभी आना बाकी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, नव्या मालिक और विधि अग्रवाल को अब तक की पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। इन दोनों पर आरोप है कि वे राजधानी और आसपास के जिलों में हाई-प्रोफाइल पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई करने वाले नेटवर्क को संचालित कर रही थीं। मामले में अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की जा चुकी है और पुलिस तीन अलग-अलग सप्लाई सिंडिकेट से जुड़े करीब 50 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 9 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस की ओर से कहा गया है कि रिमांड बढ़ने पर मामले के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच की जाएगी।

    जांच में खुलासा हुआ है कि इन पार्टियों में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते थे। पुलिस का अनुमान है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक 1500 से ज्यादा युवा ड्रग्स की गिरफ्त में आ चुके हैं, जिनमें से कई नशे के आदी हो चुके हैं। कुछ युवाओं ने नशे की लत पूरी करने के लिए खुद ही ड्रग्स पैडलिंग शुरू कर दी थी और जेल तक पहुंच चुके हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में बड़े सप्लायर और वित्तीय मददगारों तक पहुंचने के लिए आरोपियों से और पूछताछ जरूरी है। जांच एजेंसियां मनी ट्रेल और डिजिटल एविडेंस खंगालने में जुटी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रग्स की सप्लाई का पैसा कहां से आ रहा था और कहां खर्च हो रहा था।

    सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है और सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है ताकि युवाओं को ड्रग्स के दलदल से बाहर निकाला जा सके। पुलिस का कहना है कि रिमांड बढ़ने पर और बड़े खुलासे संभव हैं। अदालत का फैसला आने के बाद अगली कार्रवाई तय होगी।

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