रेत का खेल: डोंगरगांव में अफसर खुद बन गए रेत माफिया के संरक्षक

एसडीएम-तहसीलदार कार्यालय और सरकारी निवास के पीछे से हो रहा अवैध रेत उत्खनन, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ बनी ढाल

डोंगरगांव (दीपक अवस्थी) ।डोंगरगांव शहर इन दिनों अवैध रेत परिवहन का बड़ा अड्डा बन चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सारा अवैध धंधा प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।

रेत चोरी अब केवल माफियाओं का काम नहीं, बल्कि इसमें अफसरों की सीधी भूमिका सामने आ रही है। एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के पीछे स्थित घुमरिया नदी और कारिया टोला में स्थित सरकारी आवासों के पीछे से रेत चोरी खुल्लमखुल्ला हो रही है—बिना किसी डर और रोकटोक के।

 20 से अधिक घाटों पर सीधी पकड़, प्रशासन बना रेत सिंडिकेट का हिस्सा

सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों की सीधी पकड़ करीब 20 घाटों तक बन चुकी है। यहां से हर रोज सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रक भरकर रेत निकल रही है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अब खुद रेत सिंडिकेट के संरक्षक बन चुके हैं।

 पीएम आवास योजना के नाम पर हो रही तस्करी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार ने निशुल्क रेत देने का प्रावधान किया है। लेकिन इस योजना को तस्कर कानूनी कवच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

रेत से भरे ट्रैक्टर जब पकड़े जाते हैं, तो तस्कर ‘आवास निर्माण’ का बहाना बनाकर निकल जाते हैं। और इस पूरे ड्रामे में अधिकारियों की चुप्पी या सहमति साफ देखी जा सकती है।

आधे को छूट कुछ पर कार्यवाही

करियाटोला, मटिया, एच पी गैस एजेंसी के पास निकल रही रेत की छूट मिलीं वही शनिवार को रातापायली में तहसीलदार पी एल नाग और टीम ने पांच टेक्टरों पर अवैध रेत परिवहन के तहत कार्यवाही की।

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