डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।रेडियोग्राफरों को मिलने वाले रेडिएशन भत्ते को लेकर एजी खबर की 08 नवंबर 2025 की खबर का असर अब विधानसभा में दिखाई दिया है।
“31 साल से नहीं बढ़ा रेडिएशन भत्ता, आज भी सिर्फ 50 रुपए” शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद यह मुद्दा सदन में उठा।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से जुड़े प्रश्न के दौरान विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी कि प्रदेश में कितने रेडियोग्राफर पदस्थ हैं और उन्हें कितना रेडिएशन भत्ता दिया जा रहा है।
सरकार का जवाब : 50 रुपए प्रतिमाह ही भत्ता
लोक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विधानसभा में स्वीकार किया कि—
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उपस्वास्थ्य केंद्रों में रेडियोग्राफर का कोई पद स्वीकृत नहीं है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में 172 नियमित रेडियोग्राफर पदस्थ हैं।
इन्हें शासन द्वारा मात्र 50 रुपए प्रतिमाह की दर से रेडिएशन भत्ता दिया जाता है।
मंत्री ने यह भी बताया कि रेडियोग्राफरों की जिलेवार पदस्थापना की जानकारी पृथक प्रपत्र में संलग्न है।
एजी खबर ने पहले ही उजागर की थी सच्चाई
एजी खबर ने 08 नवंबर 2025 (विश्व रेडियोग्राफी दिवस) पर प्रकाशित रिपोर्ट में बताया था कि—
छत्तीसगढ़ में 324 शासकीय रेडियोग्राफर कार्यरत हैं।
वर्ष 1994 में तय किया गया 50 रुपए मासिक रेडिएशन भत्ता आज तक नहीं बढ़ाया गया।
उस समय वेतनमान 975–1675 रुपए था, जबकि आज वेतन 40–50 हजार तक पहुंच चुका है।
खतरे में स्वास्थ्य, मुआवजा नाममात्र
एजी खबर से बातचीत में राजनांदगांव के एक रेडियोग्राफर ने बताया था कि लगातार रेडिएशन के संपर्क में रहने से उन्हें उल्टी, कमजोरी और प्लेटलेट्स की कमी जैसी गंभीर समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
महासमुंद की एक महिला रेडियोग्राफर ने रेडिएशन के दुष्प्रभाव से मातृत्व और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की पीड़ा साझा की थी।
तुलना में भत्ता, सवाल स्वाभाविक
जहां—
- पटवारी को 250 रुपए
- ड्राइवर को 250 रुपए
- सहायक रोड लिपिक को 500 रुपए कंप्यूटर भत्ता
वहीं रेडिएशन जैसी उच्च जोखिम वाली सेवा देने वाले रेडियोग्राफर आज भी 31 साल पुराने 50 रुपए पर ही काम कर रहे हैं।
अब जबकि सरकार ने खुद सदन में भत्ते की सच्चाई स्वीकार कर ली है।





