Thursday, February 26, 2026
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    शराब घोटाला: 30 आबकारी अधिकारियों को ED का नोटिस

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने उस दौर में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे करीब 30 आबकारी अधिकारियों को पीएमएलए की धारा 50 के तहत पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। इनमें एक अतिरिक्त आयुक्त, पांच उपायुक्त, 14 सहायक आयुक्त (जिनमें से तीन सेवानिवृत्त हैं), सात जिला आबकारी अधिकारी (चार सेवानिवृत्त) और तीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी शामिल हैं।

    समन की अनदेखी, सख्त कार्रवाई की चेतावनी

    सूत्रों के मुताबिक, नोटिस मिलने के बावजूद अब तक कोई भी अधिकारी पेश नहीं हुआ है। ईडी ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी लगातार समन की अवहेलना करते रहे, तो उन्हें अदालत में पेश करने के लिए कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी।

    इन अफसरों को भेजा गया नोटिस

    जिन 30 आबकारी अधिकारियो को नोटिस जारी हुआ है उनमें 01 अतिरिक्त आयुक्त, 05 उपायुक्त, 14 सहायक आयुक्त (3 सेवानिवृत्त), 07 जिला शिक्षा अधिकारी (4 सेवानिवृत्त) और सहायक स्तर के 03 अन्य अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ACB/EOW द्वारा दायर एक नए आरोपपत्र में नाम आने के बाद, अधिकारियों पर ईडी ने PMLA की धारा 50 के तहत मामला दर्ज किया है। ईडी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक EOW और ईडी दोनों द्वारा ठोस सबूत पेश किए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने पिछले हफ़्ते जारी किए गए समन को अब तक नज़रअंदाज़ किया है। समन का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है अगर ये अधिकारी आरोपपत्र और हमारी जाँच की पृष्ठभूमि के बावजूद टालमटोल करते रहे, तो हमें उन्हें अदालत में पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

    रायपुर की एक विशेष अदालत में 7 जुलाई को दायर SEOIACB के चौथे पूरक आरोपपत्र में उन सभी तीस अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें सात सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सूची में एक अतिरिक्त आबकारी आयुक्त आशीष श्रीवास्तव, पांच उपायुक्त अनिमेष नेताम, विजय सेन शर्मा, अरविंद कुमार पटले, नीतू नोतानी ठाकुर और नोबर सिंह ठाकुर,प्रमोद कुमार नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास कुमार गोस्वामी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, सोनल नेताम, प्रकाश पाल, आलेख राम सिदार, आशीष कोसम और राजेश जयसवाल, साथ ही सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त जी.एस. नुरूटी, वेदराम लहरे और एल.एल. ध्रुव, सात जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) इकबाल खान, मोहित कुमार जयसवाल गैरीपाल सिंह दर्डा, सेवानिवृत्त जिला आबकारी अधिकारी ए.के. सिंह, जे.आर. मंडावी, देवलाल वैध और ए.के. अनंत और दो सहायक जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव और नितिन खंडूजा, और एक सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूश्री कसार शामिल है। जांचकर्ताओं ने पाया है कि 2019 और 2023 के बीच, ये अधिकारी पंद्रह जिलों में तैनात थे।

    घोटाले का आकार बढ़ा, 3,200 करोड़ पहुँचा

    शुरुआत में 2,161 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था, लेकिन गहन विश्लेषण के बाद अब इस घोटाले का आकार 3,200 करोड़ रुपये आंका गया है। ईओडब्लू की जांच के मुताबिक पार्ट-ए में 319.32 करोड़ रुपये, पार्ट-बीएटी में 2,174.67 करोड़ रुपये और पार्ट-सी में 70 करोड़ रुपये की राशि शामिल है जो कुल मिलाकर 2,563 करोड़ रुपये होती है, जबकि ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जाँच इन आँकड़ों को व्यापक अनुमान के दायरे में रखती है।

    बड़े नाम सलाखों के पीछे

    ईडी और EOW के द्वारा अब तक की कुल कार्रवाई में पाँच आरोपपत्र और तेरह गिरफ्तारियाँ हो चुकी है। इस घोटाले में जेल में बंद आरोपियों में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, व्यवसायी अनवर ढेबर और विशेष सचिव (आबकारी) अरुणपति त्रिपाठी शामिल हैं।

    पूर्व आबकारी आयुक्त की गिरफ्तारी

    इस महीने की शुरुआत में बड़ा झटका तब लगा जब पूर्व आबकारी आयुक्त और आईएएस अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार किया गया। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगे हैं। दास पर आरोप है कि उन्होंने टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर के साथ मिलकर एक समानांतर तंत्र खड़ा किया, जिसने आबकारी विभाग की नीतियों में हेरफेर कर अवैध लाभ उठाया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाया।

    झारखंड कनेक्शन भी सामने आया

    जांच एजेंसियों का दावा है कि निरंजन दास झारखंड में भी “छत्तीसगढ़ मॉडल” लागू करने की कोशिशों से जुड़े थे। जनवरी 2022 की एक बैठक में उन्होंने वहां भी नीतिगत बदलावों पर जोर दिया था, जिससे राज्य के राजस्व को नुकसान पहुँचा।

    आगे की राह

    ईडी और EOW के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हालिया नोटिस आबकारी विभाग के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में “एक अहम चरण” है। जांचकर्ता मानते हैं कि यह घोटाला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर तैयार किया गया एक समानांतर ढाँचा था, जिसने छत्तीसगढ़ की आबकारी व्यवस्था को भीतर से खोखला कर दिया।

     

     

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