बालोद। बालोद जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी अंतर्गत शासकीय प्राथमिक स्कूल कांडे में शाला प्रवेश उत्सव के दिन ही स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगे होने से हड़कंप मच गया। स्थिति से नाराज बच्चों और उनके परिजन स्कूल के बाहर पंडाल लगाकर धरने पर बैठ गए और शिक्षक की कमी को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से केवल एक शिक्षक के भरोसे 99 बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही थी। कई बार अतिरिक्त शिक्षक की मांग किए जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया। इसी से आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन आंदोलन का रास्ता अपनाया। ए प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और जल्द स्थायी शिक्षक की व्यवस्था की मांग की। स्कूल के बाहर बच्चों और अभिभावकों का धरना काफी देर तक चलता रहा, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और तहसीलदार, पुलिस तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। लंबी चर्चा के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति बनी कि स्कूल में अस्थायी रूप से संगवारी शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और बच्चों को स्कूल में प्रवेश की अनुमति दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को फिर से उजागर कर दिया है, जहां एक ही शिक्षक के भरोसे बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर शिक्षक की व्यवस्था नहीं होती है तो बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्थायी शिक्षक की नियुक्ति को लेकर उच्च स्तर पर प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। घटना के बाद क्षेत्र में थोड़ी देर के लिए असंतोष का माहौल रहा, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हो गई। बच्चे और अभिभावक स्कूल लौट आए और शैक्षणिक गतिविधियां फिर से शुरू कर दी गईं।






