संयोग नहीं, आस्था है: आरती के समय खुद पहुंचती हैं गौ माता

डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।सावन का पावन महीना, मंदिरों में गूंजती घंटियों की मधुर ध्वनि, और उस बीच एक अद्भुत दृश्य—डोंगरगांव के साकेत धाम स्थित शिव मंदिर में हर सुबह और शाम एक विशेष मेहमान की उपस्थिति श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देती है।

आरती शुरू होते ही मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ती हैं एक गौ माता—न कोई आवाज़, न किसी का बुलावा। समय इतना सटीक कि जैसे प्रभु ने ही उन्हें आमंत्रित किया हो।

स्थानीय श्रद्धालु दीपक गुप्ता बताते हैं, “पहले-पहल लगा जैसे कोई संयोग हो, पर जब यह नज़ारा रोज़ देखने को मिला, तो महसूस हुआ कि यह तो किसी आस्था का जीवंत प्रमाण है। लगता है जैसे गौ माता आरती का इंतजार करती हों।

मंदिर के पुजारी प्रवीण तिवारी भावुक होकर कहते हैं, “गौ माता सीधा दीया-बत्ती के सामने बैठती हैं, पूरी आरती के दौरान वहीं रहती हैं और जैसे ही आरती समाप्त होती है, चुपचाप लौट जाती हैं। यह कोई सामान्य घटना नहीं है, यह आस्था की एक जीवंत अनुभूति है।

सावन के इस पुण्य मास में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है, लेकिन सभी के लिए सबसे विशेष क्षण होता है—गौ माता की वह अलौकिक उपस्थिति।

लंबे समय से आरती में शामिल हो रही मंगला बाई की आंखें भर आती हैं, “ऐसा दृश्य मैंने जीवन में कभी नहीं देखा। लगता है जैसे भगवान स्वयं आरती में भेजते हैं।”

यह घटना अब डोंगरगांव की पहचान बन चुकी है। हर दिन सुबह और शाम का यह क्षण न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

गौ माता की यह उपस्थिति अब किसी संयोग की बात नहीं रही—यह आस्था, परंपरा और प्रकृति के अद्भुत संगम का जीवंत प्रमाण बन चुकी है।

Hot Topics

Related Articles