1989 में, कोस्टा रिका के एक मछुआरे चितो शेडेन को रेवेंटाज़ोन नदी के किनारे एक मरणासन्न मगरमच्छ मिला। उस मगरमच्छ को सिर में गोली लगी थी और वह मुश्किल से सांस ले पा रहा था। लेकिन चितो ने उसे वहीं मरने के लिए छोड़ने के बजाय कुछ असाधारण किया—उसने करीब 5 मीटर लंबे उस मगर को अपनी नाव में घर ले आया, उसका नाम पोचो रखा और उसकी देखभाल करने लगा।
चितो ने उसे चिकन और मछली खिलाई, यहां तक कि वह अपने शेड के फर्श पर उसके पास सोया करता था। एक समय ऐसा आया जब पोचो ने खाना पीना छोड़ दिया, तब चितो ने उसे मुँह से साँस देकर जीवनदान देने की कोशिश की। तमाम बाधाओं के बावजूद पोचो ठीक हो गया। इसके बाद जो हुआ, वह मानव और जानवर के बीच के सबसे अनोखे और गहरे रिश्तों में से एक बन गया।
समय के साथ चितो और पोचो के बीच का रिश्ता और भी मजबूत होता गया। चितो का मानना था कि पोचो उसकी बातों, मनोदशा और भावनाओं को समझता था। वे दोनों साथ नदी में तैरते थे और चितो के घर के पास लोगों के सामने प्रदर्शन करते थे। पोचो खुद को चितो से गले लगवाने देता था, चुम्बन लेने देता था और एक पालतू की तरह बातें सुनता था। दुनियाभर से पर्यटक इस असाधारण दोस्ती को देखने आते थे—एक ऐसा जानवर जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता है, वह स्नेह, कोमलता और विश्वास का प्रतीक बन गया।
चितो की इस लगन ने reportedly उसकी शादी को भी तोड़ दिया। लेकिन वह इससे विचलित नहीं हुआ। उसने कहा था—”मैं और पत्नी ढूंढ सकता हूं, लेकिन दूसरा पोचो कभी नहीं मिलेगा।”
जब 2011 में पोचो की मृत्यु हुई, तो वह सिर्फ एक दोस्त की मौत नहीं थी—बल्कि पूरे देश के लिए शोक का क्षण था। चितो ने उसके लिए सार्वजनिक अंतिम संस्कार करवाया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। वह उसके खुले ताबूत के पास रोया और उसकी याद में एक आखिरी बार नदी में तैरा। उसने पोचो को कभी पालतू नहीं कहा, बल्कि उसे अपना सबसे अच्छा दोस्त और सबसे करीबी साथी बताया।
उनकी कहानी आज भी एक दुर्लभ उदाहरण मानी जाती है, जो यह दिखाती है कि अगर सच्चे मन से देखभाल, धैर्य और प्यार दिया जाए तो सबसे जंगली जीव भी प्रेम और अपनापन महसूस कर सकते हैं।





