सच्ची कहानी : हिमालय पुत्र के अदम्य साहस और मृत्यु पर विजय की गाथा

29 मई 2026 यानि कि वो तारीख जब नेपाल की सभी कंपनियों का एवरेस्ट एक्सपीडिशन ऑलमोस्ट पैकअप मोड में आ चुका था, सब बेस कैंप से काठमांडू की तरफ जाने लगे थे और एवरेस्ट के रास्ते में लगी रोप, लैडर सब रिट्रीव किए जा रहे थे।

लेकिन फिर १ तारीख को पता चला कि हिमालयन ट्रेवर्स नाम की एक छोटी कंपनी का ५२ वर्षीय शेरपा हिलेरी दावा शेरपा लापता है और पिछली बार उसकी हाल खबर कैंप ३ के ऊपर मिली थी। हिमालयन ट्रेवर्स अपने क्लाइंट 8K एक्सपीडिशन से मैनेज करवाती थी इसीलिए दोनों के बीच मिस मैनेजमैंट और मिस कम्युनिकेशन के कारण ये स्थिति पैदा हुई।

अब..? पूरे नेपाल शेरपा कम्युनिटी और सागरमाथा पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के बीच धर्म संकट आ गया कि अब क्या किया जाए..? शेरपा को वही मरने के लिए छोड़ दिया जाए या फिर उसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाए..? जबकि खुम्भु आइस फॉल एरिया से लैडर रस्सियां सब खोल ली गई है।

इन्हीं सब कन्फ्यूजन के बीच शेरपा के खोने के ६ दिन बीतने के बाद ३ जून को हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन स्टार्ट किया गया लेकिन दावा शेरपा का कुछ पता नहीं चला। सबने ऑलमोस्ट आशा खो दी थी कि बिना खाने पीने और ऑक्सीजन के कोई कैंप ३ के ऊपर से खोया हुआ आदमी जिंदा भी हो सकता है।

हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में भी कुछ नहीं मिला यानि कि शेरपा को लोकेट नहीं किया जा सका लेकिन ४ तारीख की सुबह खुम्भुं आइस फॉल एरिया के क्रैम्पोंन प्वाइंट पर एक हलचल दिखी और पता चला कि ये वही शेरपा है जिसे पिछले ६ दिनों से खोजा जा रहा है।

शेरपा की हालात बहुत खराब थी और फ्रॉस्ट बाइट के साथ वो कुछ बोलने लायक भी नहीं बचा था और वो यहां तक जिंदा कैसे पहुंचा ये अपने आप में एक चमत्कार था जिसका खुलासा शेरपा की हालात ठीक होने पर ही पता चलेगा।

इस घटना ने ये तो साफ कर दिया कि नेपाली शेरपा इंसान नहीं होते है बल्कि वो हिमालयी येति होते है बल्कि इस ऑपरेशन ने इन्हीं शेरपाओ पर लगने वाले एक कलंक से भी बचा लिया कि जिसमें दावा किया जाता है कि वो अपने शेरपा भाई के लिए आखिरी सांस तक कोशिश करते है।

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