हाईकोर्ट ने अमित बघेल को 14 FIR में 3 माह की अंतरिम राहत दी

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने आज 09 अप्रैल 2026 को जोहार छत्तीसगढ़िया पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल को उनके खिलाफ दर्ज एकाधिक एफआईआर में अंतरिम राहत प्रदान की है। सूत्रों के अनुसार ये एफआईआर श्री बघेल द्वारा वी.आई.पी. चौक, रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के विघटन की घटना के संबंध में दिए गए प्रेस वक्तव्य के आधार पर दर्ज की गई थीं। कुल 14 एफआईआर थाना तेलीबांधा, कोतवाली और देवेन्द्र नगर में पंजीकृत थीं। अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने अमित बघेल को तीन माह की अंतरिम जमानत देने का निर्णय लिया है। अंतरिम जमानत की शर्तों में यह भी शामिल है कि इस अवधि के दौरान वे रायपुर जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर निवास नहीं करेंगे। हालांकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा निर्धारित तिथियों पर उपस्थिति देने के लिए उन्हें जिले में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। श्री बघेल की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष उनका पक्ष रखा। वहीं आपत्तिकर्ता की ओर से सुनील ओटवानी और राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने पैरवी की।  न्यायालय ने दोनों पक्षों को विस्तृत रूप से सुना और स्थिति की गंभीरता का आकलन करने के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत के निर्णय से अमित बघेल फिलहाल पुलिस हिरासत और एफआईआर की कार्रवाई से राहत में हैं। यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि मामला छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा से जुड़ा है। अमित बघेल के समर्थक इसे न्यायालय द्वारा दी गई उचित राहत के रूप में देख रहे हैं, जबकि विपक्ष ने इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने बताया कि अंतरिम राहत मिलने से उनके मुवक्किल की कार्यवाही में बाधा नहीं आएगी और वे कानूनी प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग करेंगे। वहीं पुलिस और प्रशासन अब मामले की आगे की जांच के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे। यह मामला प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों और संवेदनशील सामाजिक मामलों के बीच न्यायिक संतुलन बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण मिसाल भी माना जा रहा है।

 

 

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