10 जगह अवैध प्लाटिंग के हॉटस्पॉट, 20 करोड़ के खर्च में फंसी नगर पंचायत

बिना मास्टर प्लान के पनपी बस्तियां — अब सड़क और नाली की जिम्मेदारी पंचायत पर

डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।नगर में अवैध प्लाटिंग का ऐसा जाल बिछ चुका है कि अब नगर पंचायत पर करोड़ों का बोझ पड़ने वाला है। करीब 10 से अधिक स्थानों पर अवैध प्लाटिंग के हॉटस्पॉट बन चुके हैं, जहाँ बिना अनुमति के बसाई गई बस्तियों में अब लोग सड़क, नाली और बिजली जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सिर्फ इन क्षेत्रों के विकास कार्यों पर लगभग 20 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है।

मास्टर प्लान की अनदेखी — विभाग मौन

डोंगरगांव के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान की पूरी तरह अनदेखी की गई। दर्जनों अवैध प्लॉट काटे गए, मकान खड़े हो गए, लेकिन न तो राजस्व विभाग, न ही नगर पंचायत, और न ही ग्राम एवं नगर निवेश विभाग ने कोई कार्रवाई की। अब हालात यह हैं कि बस्तियों को वैध मानकर विकास कार्यों की मांग की जा रही है।

रेरा से अप्रूव नहीं एक भी प्रोजेक्ट

रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से एक भी प्रोजेक्ट अप्रूव नहीं है। इसके बावजूद खुलेआम प्लॉटों की बिक्री और मकान निर्माण जारी है। यह सब नगर प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।

दलालों के कब्जे में पूरा शहर

सूत्रों के अनुसार, शहर में करीब 10 बड़े दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। बताया जाता है कि कई पटवारी और राजस्व निरीक्षक आम नागरिकों के काम छोड़कर इन्हीं दलालों के इशारों पर काम करते हैं।

नगर के भू-राजस्व मानचित्र में अवैध रूप से काटे गए है।

इन जगहों पर बने अवैध प्लाटिंग हॉटस्पॉट

  • कॉलेज रोड
  • तिगाला पेट्रोल पंप के सामने और पीछे
  • मोगरा कॉलोनी
  • मनेरी मार्ग
  • बोधी टोला
  • मटिया
  • शीतला मंदिर के पीछे
  • जैन मंदिर के पीछे
  • करियाटोला

नगर पंचायत की वित्तीय हालत बिगड़ी

नगर पंचायत की आय-व्यय का संतुलन पहले से ही डगमगाया हुआ है —

वार्षिक डिमांड :           ₹1.90 करोड़, वसूली लगभग 60%

शासन से मासिक चुंगी : ₹2.30 लाख (वार्षिक ₹13 लाख)

यात्री कर और उत्पाद कर मिलाकर : ₹2–3 लाख सालाना

अधोसंरचना मद :     लगभग ₹1.5 करोड़ सालाना

इन सीमित संसाधनों के बीच अगर अवैध बस्तियों को नियमित किया गया, तो पंचायत की पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है।

इस तरह चल रहा खेल

भूमाफिया पहले खेतों या खसरा जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर प्लॉट के रूप में बेचते हैं। खरीदार को रेरा या नगर निवेश की अनुमति की जानकारी नहीं दी जाती, और कुछ ही महीनों में वहां पक्के मकान खड़े हो जाते हैं। बाद में वही निवासी मूलभूत सुविधाओं की मांग करते हैं, जिससे प्रशासन पर वैध करने का दबाव बढ़ जाता है।


इस विषय में जानकारी नहीं है, यदि इस तरह हो रहा है तो जल्द कार्यवाही की जाएगी।

विनम्र जेमा

सी एम ओ नगर पंचायत डोंगरगांव


इस विषय में डोंगरगांव के एस डी एम और तहसीलदार बता पाएंगे। उनकी दी सूची के अनुसार ही कार्यवाही होती है।

                                कमला सिंह

                   उप संचालक, ग्राम एवं नगर निवेश

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