Sunday, February 22, 2026
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    15 वर्षीय गुम नाबालिग बालिका को पुलिस ने चंद घंटे में किया बरामद

    बिलासपुर। थाना कोनी पुलिस ने 20 फरवरी 2026 को गुम हुई 15 वर्षीय नाबालिग बालिका को चंद घंटों के भीतर सुरक्षित बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। मामला अप0 क्र. 71/2026, धारा 137(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया और तत्परता से जांच-पड़ताल की गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी नाबालिग पुत्री (लगभग 15 वर्ष 6 माह) दामाद के ग्राम निरतू स्थित घर से बिना बताए कहीं चली गई है। परिजनों ने आशंका जताई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बालिका का बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया है। रिपोर्ट मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया और तत्काल पुलिस टीम गठित की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के निर्देश एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल तथा नगर पुलिस अधीक्षक कोतवाली गगन कुमार के मार्गदर्शन में तलाशी अभियान शुरू हुआ। पुलिस टीम ने गुमशुदा बालिका की खोज के दौरान सूचना प्राप्त की कि वह रेलवे स्टेशन घुटकू के आसपास देखी गई है। सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुँची और क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया। पुलिस की सक्रियता और तत्परता के कारण बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। पूछताछ में बालिका ने बताया कि वह पारिवारिक कारणों से नाराज होकर ट्रेन से कहीं जाने की तैयारी कर रही थी। बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित अनहोनी को टाल दिया। बालिका को विधिवत तरीके से परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस अवसर पर पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर सतत निगरानी रखें और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें। थाना कोनी पुलिस के निरीक्षक ने बताया कि बालिकाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए इस प्रकार की तत्परता और सक्रियता समय की मांग है।  उन्होंने कहा कि गुमशुदा मामलों में प्रत्येक मिनट की देरी गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए सूचना मिलने पर तुरंत कार्यवाही की जाती है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि बिलासपुर पुलिस अपनी सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभा रही है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गुमशुदा बच्चों के मामले में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और सतर्कता अभिभावकों और नागरिकों के लिए सुरक्षा का भरोसा बढ़ाती है। थाना कोनी पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बालिकाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों और समाज का भी साझा कर्तव्य है। समय पर सूचना और सतर्कता बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है। इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश भी जाता है कि गुमशुदा बच्चों के मामलों में पुलिस तुरंत सक्रिय होती है और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सकता है।

     

     

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