गजेंद्र साहू।वैसे तो अंग्रेज़ी नववर्ष की शुरुआत से ही त्योहारों और पर्वों का ताँता लगा रहता है । ख़ासकर मकर संक्रांति और गणतंत्र दिवस पहले माह में बेहद ख़ास है किंतु एक और ख़ास दिन जिसे सभी भारतवासियों को अवश्य मनाना चाहिए वह है “मतदाता दिवस”। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के असली नायक मतदाता ही है, जो अपनी सूझबूझ और विवेक से अपने सुनहरे भविष्य के लिए अपने मत द्वारा सरकार का निर्माण करते हैं । सही मायनों में यह दिवस भारत के एक-एक मतदाता के लिए गौरवशाली होना चाहिए ।
एतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार 25 जनवरी 1950 को भारतीय निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ । भारत में चुनाव करने की ज़िम्मेदारी भारतीय निर्वाचन आयोग की है । मतदाताओं में मतदान के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाने हेतु 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा मतदाता दिवस की शुरुआत की गई और तब से हर साल इस दिन मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
यह बात विचारणीय भी है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में मतदाता दिवस के प्रति लोगों में जानकारी का अभाव भी है । यह कुछ क्षेत्रों में विस्तृत है । हालाँकि सरकार एवम् कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा इस दिन लोगों को मतदान के प्रति जागरूकता फैलाने, भारतीय चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भागीदारी बनाने के लिए शिविरों का आयोजन, विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति को मतदान का अधिकार है ताकि मतदाता अपने मत की ताक़त समझ सकें और वे अपने विवेक, स्वेच्छा से बिना किसी लोभ-लालच या दबावपूर्ण स्थिति में न आकर अपने उम्मीदवार का चुनाव कर भारतीय चुनाव प्रक्रिया के महायज्ञ में आहुति दे सकें।





