टीईटी की अनिवार्यता के मुद्दे पर अब आंदोलन, आज रोड पर उतरेंगे शिक्षक

बलौदाबाजार ,प्रदेश के 82 हजार सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा अब आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षक साझा मंच के आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेशभर के शिक्षकों के साथ बलौदाबाजार जिले के शिक्षक भी आंदोलन में शामिल होंगे। जिले के विभिन्न ब्लॉक मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन के साथ ‘सेवा सुरक्षा न्याय रैली’ निकालकर टीईटी में अवसर देने और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की वरिष्ठता व पदोन्नति सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी।

तीन प्रमुख शिक्षक संगठनों छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ और सर्व शिक्षक संघ के संयुक्त आह्वान पर आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत हो रही है। जिले के शिक्षक भी इसमें सहभागिता करेंगे। संगठनों का कहना है कि वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को केवल टीईटी की अनिवार्यता के आधार पर असुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए।

लंबे समय से न्याय की मांग की जा रही: छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि सेवारत शिक्षकों के टीईटी संबंधी मुद्दे पर लंबे समय से न्याय की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि पर्याप्त अवसर दिए बिना टीईटी के आधार पर वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित करना उचित नहीं है।

इससे शिक्षकों में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ रहा है। नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि शिक्षा विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों की वरिष्ठता और अनुभव का सम्मान होना चाहिए। यदि टीईटी के कारण वरिष्ठ शिक्षक पदोन्नति से वंचित होते हैं और कनिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति होती है तो भविष्य में वेतन विसंगति और प्रशासनिक असंतोष की स्थिति बन सकती है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है, तो उन्हें परीक्षा में शामिल होने का पर्याप्त अवसर भी मिलना चाहिए। उनका सवाल है कि जब परीक्षा ही आयोजित नहीं होगी, तो शिक्षक टीईटी की पात्रता कैसे हासिल करेंगे। संगठनों ने मांग की है कि पहले परीक्षा का अवसर दिया जाए और उसके बाद ही पदोन्नति अथवा सेवा संबंधी निर्णय लिए जाएं।

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