चिखलाकसा। नगर पंचायत चिखलाकसा के वार्ड नंबर 2 में करीब ₹12 लाख 50 हजार की लागत से लगाया गया ट्यूबलर पोल 12 साल का सफर 48 माह भी पूरा नहीं कर पाया? लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए इस पोल की मौजूदा हालत ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 2 में लगाए गए इस ट्यूबलर पोल के कार्य में सती कंस्ट्रक्शन, गुंडरदेही का नाम सामने आ रहा है। आखिर ₹12 लाख 50 हजार की लागत से लगाए गए इस ट्यूबलर पोल की हालत महज 48 माह के भीतर ही खराब क्यों हो गई? क्या कार्य के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्य का भौतिक सत्यापन किया गया था?
लाखों खर्च, फिर भी अंधेरा कायम?
वार्ड नंबर 2 में ट्यूबलर पोल की हालत खराब होने के साथ ही वार्ड नंबर 2 और 3 में लगे कई स्ट्रीट पोल भी पिछले कई दिनों से बंद पड़े हैं। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर स्थापित की गई प्रकाश व्यवस्था का लाभ आम नागरिकों को नहीं मिल पा रहा है। रात के समय कई इलाकों में अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनता के मन में सवाल है कि 12 साल के लिए लगाई गई व्यवस्था 48 माह भी क्यों नहीं चल पाई? ₹12.50 लाख का ट्यूबलर पोल, 12 साल का सफर 48 माह भी नहीं चल पाया? वार्ड नंबर 2 में व्यवस्था पर सवालक्या इसकी नियमित देखरेख की गई? क्या पोल की स्थिति की समय-समय पर जांच होती रही? खराब होने के बाद इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है?
“अंधेर नगरी, चौपट राजा” वाली व्यवस्था पर सवाल?
नगर पंचायत की इस स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी स्ट्रीट लाइट और ट्यूबलर पोल जैसी मूलभूत सुविधाएं सुचारू नहीं रह सकतीं, तो आखिर इन पर खर्च किए गए पैसे का फायदा जनता को कब मिलेगा?
नगर पंचायत में पूर्व में हुए कार्यों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं और वर्तमान में भी कुछ कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। क्या इन मामलों की कभी निष्पक्ष जांच हुई? क्या जिम्मेदारी तय की गई?
इन कथित अनियमितताओं और लापरवाही के आरोपों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
- सीएमओ का वर्जन लेने किया गया फोन, कॉल नहीं हुआ रिसीव
मामले में नगर पंचायत चिखलाकसा के सीएमओ अरविंदनाथ योगी का पक्ष जानने के लिए हमारे द्वारा दो से तीन बार फोन कॉल किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। लगातार प्रयास के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। क्या नगर पंचायत प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष जनता के सामने रखेगा? सीएमओ का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब दस्तावेज बताएंगे लाखों रुपये का हिसाब?
स्थानीय नागरिकों ने वार्ड नंबर 2 में लगाए गए ट्यूबलर पोल से संबंधित टेंडर, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका, भुगतान संबंधी दस्तावेज और रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
अब सवाल सिर्फ एक ट्यूबलर पोल के खराब होने का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि जनता के ₹12.50 लाख खर्च करने के बाद भी 12 साल का सफर 48 माह में ही क्यों थम गया? आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
₹12.50 लाख का पोल… 12 साल का सफर 48 माह भी नहीं चल पाया? अब सवाल जनता पूछ रही है—जवाब कौन देगा?














