बुखार में खुद से दवा लेने से बचें, डॉक्टरी सलाह जरूरी

बलौदाबाजार भाटापारा,आसमान में छाए बादल, रुक-रुककर बारिश, सर्द हवाओं और तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। जिले में वायरल फीवर से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल की शिशु ओपीडी में इन दिनों आम दिनों की तुलना में अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं, जबकि बच्चा वार्ड में भी मरीजों की संख्या बढ़ने से बेड लगभग फुल चल रहे हैं। तेज बुखार के साथ कई बच्चों में दस्त, सर्दी-खांसी और संक्रमण जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश बच्चों में एक जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। सामान्य स्थिति में पांच दिन की दवा का डोज देकर उपचार किया जा रहा है, जबकि तेज बुखार या गंभीर लक्षण वाले बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी, पीएचसी और निजी अस्पतालों में भी वायरल फीवर से पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है।

 

जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अब तक किसी एक वार्ड, गांव, स्कूल-कॉलेज या छात्रावास से मलेरिया, पीलिया या डायरिया के बड़ी संख्या में मरीज सामने नहीं आए हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि इन दिनों बच्चों में वायरल फीवर, संक्रमण और दस्त की शिकायतें अधिक मिल रही हैं। ठंड और बारिश के दौरान बुखार के लक्षणों में बदलाव हो सकता है ठीक होने में करीब एक सप्ताह तक का समय लग सकता है। शिशु ओपीडी में औसतन 40 से 50 बच्चे प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सर्दी-खांसी, जुकाम और अन्य लक्षणों की जांच के बाद दवा दी जा रही है। तेज बुखार होने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। डॉ. नितिन तिवारी ने बताया कि बारिश के मौसम में कई बीमारियां दूषित पानी और संक्रमण के कारण होती हैं। इसलिए पानी उबालकर पीना चाहिए और खानपान में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि तेज बुखार वाले कुछ मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। कुछ बच्चों में निमोनिया के लक्षण भी सामने आए हैं, लंबे समय तक सर्दी खांसी रहने से बढ़ सकते हैं।

 

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