जन्मदिन पर जगमगाएंगे करोड़ों दीये, लेकिन रानी सागर की सफाई ने खड़े किए सवाल

विश्वनाथ देवांगन ,राजनांदगांव  ।कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है और इस अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देशभर में अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के आह्वान पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन को लेकर आम जनता से भी एक दिया जलाकर शुभकामनाएं और आशीर्वाद देने की अपील की जा रही है। संस्कारधानी राजनांदगांव में भी इस आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिल रही हैं, जहां रानी सागर तालाब के आसपास बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारी की जा रही है।

लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। जिस रानी सागर तालाब और उसके आसपास के क्षेत्र की सफाई को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, वहां अब अचानक रातों-रात सफाई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जिन स्थानों पर लंबे समय से गंदगी पसरी हुई थी, जहां की दीवारों और आसपास के क्षेत्रों में काफी समय से रंग-रोगन नहीं हुआ था, वहां अब प्रधानमंत्री के जन्मदिन के आयोजन को देखते हुए सफाई, पुताई और सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है।

ऐसे में सवाल यह नहीं है कि सफाई क्यों की जा रही है, बल्कि सवाल यह है कि आखिर इस सफाई के लिए किसी विशेष आयोजन का इंतजार क्यों करना पड़ा? अगर रानी सागर शहर की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है, तो उसकी नियमित सफाई और रखरखाव पहले से क्यों नहीं किया गया? क्या शहर के तालाबों, सार्वजनिक स्थलों और आसपास फैली गंदगी को साफ रखने के लिए केवल बड़े आयोजन और विशेष अवसर ही जरूरी हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर एक दिया जलाकर शुभकामनाएं देने की अपील की जा रही है, लेकिन इसी के साथ आम जनता के बीच यह चर्चा भी है कि क्या इस तरह के अवसरों पर स्वच्छता को लेकर भी कोई व्यापक संदेश दिया जा सकता है? क्या लोगों से यह अपील नहीं की जा सकती कि वे अपने आसपास कचरा न फैलाएं, तालाबों और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखें और सफाई को केवल किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित न रखें?

रानी सागर में दीयों की रोशनी निश्चित रूप से एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करेगी, लेकिन लोगों की उम्मीद है कि यह चमक केवल एक रात तक सीमित न रहे। शहर की सफाई व्यवस्था, तालाबों की स्वच्छता और सार्वजनिक स्थलों का रखरखाव भी नियमित रूप से किया जाए, ताकि किसी जन्मदिन, त्योहार या विशेष आयोजन से पहले अचानक सफाई अभियान चलाने की जरूरत ही न पड़े। अब देखना यह होगा कि आयोजन के बाद भी रानी सागर और उसके आसपास की यही स्वच्छता बनी रहती है या फिर दीयों की रोशनी बुझने के साथ सफाई व्यवस्था भी पुराने ढर्रे पर लौट जाती है।

Hot Topics

Related Articles