भाटापारा। UPI एवं डिजिटल लेन-देन पर व्यापारियों से प्रस्तावित MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क को लेकर भाटापारा के व्यापारिक जगत में चिंता जताई गई है। व्यापारियों एवं छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं, लेकिन डिजिटल लेन-देन का अतिरिक्त वित्तीय भार व्यापारियों पर डालना उचित नहीं है।
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह सलूजा ने कहा कि वर्तमान समय में खुदरा एवं थोक व्यापार सीमित लाभ मार्जिन पर संचालित हो रहा है। देश में डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में व्यापारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक शुल्क अथवा ₹300 तक की कैपिंग जैसे प्रावधान लागू किए जाते हैं, तो इसका सीधा वित्तीय भार व्यापारियों पर पड़ेगा।
चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने केंद्र सरकार एवं वित्त मंत्रालय से मांग की कि व्यापारियों के लिए सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क पूर्णतः 0 प्रतिशत रखा जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास एवं संचालन का खर्च बैंकों और सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए, ताकि व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।
वहीं श्रीचंद छाबड़िया ने कहा कि व्यापारियों का विरोध UPI अथवा डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। UPI ने भुगतान को तेज, सरल, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि किसी भी अतिरिक्त शुल्क को लागू करने से पहले छोटे दुकानदारों, लघु व्यापारियों और कम मार्जिन वाले कारोबारियों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का अध्ययन किया जाना चाहिए।
चैंबर ऑफ कॉमर्स भाटापारा के अध्यक्ष गुरमुख गंगवानी ने कहा कि 15 अक्टूबर से UPI भुगतान पर कारोबारियों से शुल्क लिए जाने की चर्चाओं के बीच व्यापारियों में चिंता और नाराजगी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त खर्च जुड़ने से व्यापारियों के कारोबार पर असर पड़ सकता है और इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों पर भी पड़ने की संभावना है।
लक्ष्मीनारायण सोनी ने कहा कि UPI ने भुगतान प्रक्रिया को तेज, सरल एवं पारदर्शी बनाया है। व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में हैं, लेकिन छोटे एवं कम मार्जिन वाले कारोबारियों को किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाया जाना आवश्यक है।
चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व एवं NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। चेम्बर ने दोहराया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने की लागत का पूरा भार व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए और MDR शुल्क को शून्य रखने की मांग की गई है।








