बिलासपुर जिले में आयुष्मान भारत योजना बेपटरी, सर्वर ब्लॉक होने से मरीजों को उठानी पड़ रही भारी फजीहत

कमलकांत पाटनवार 

बिलासपुर:- स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देने वाली महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना इन दिनों तकनीकी पेचीदिगियों के बीच उलझकर रह गई है। स्थिति यह है कि पिछले 10 दिनों से जिलेभर में एक भी नया आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। तकनीकी व्यवधान के कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे गंभीर और जरूरतमंद मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

योजना से जुड़े जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) स्तर पर वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के तहत डेटा को सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीयकृत) करने और एपीआइ लिंकिंग का काम चल रहा है, जिसके चलते यह बाधा उत्पन्न हुई है।

योजना के तहत जिले के कई निजी और सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड काउंटर बनाए गए हैं, जहां से मरीजों को आन-द-स्पाट कार्ड बनाकर इलाज की सुविधा मिलती थी। लेकिन पिछले 10 दिनों से सर्वर ब्लाक होने और डेटा लिंक न होने के कारण काउंटर पर पहुंचने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।

कई मरीज ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता है, लेकिन कार्ड न बन पाने की वजह से उनका केस ब्लाक हो गया है और वे भगवान भरोसे इलाज कराने को विवश हैं। आयुष्मान भारत से इलाज करने वाले अस्पताल भी बिना आयुष्मान भारत कार्ड के इलाज करने से पीछे हट रहे हैं।

इसमें अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वैसे भी बिना बताए क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है, वही बिना कार्ड के वर्तमान में इलाज करे और भविष्य में क्लेम करें तो क्लेम राशि मिलने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में जिन मरीजों के पास कार्ड नहीं है और उन्हें इलाज करवाने की अवश्यकता हो रही है तो कार्ड के अभाव में वे आयुष्मान भारत के लाभ से वंचित होते जा रहे हैं।

क्या है तकनीकी कारण और कब तक सुधरेगा सिस्टम ?

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक राशन कार्ड डेटाबेस को केंद्रीय स्तर पर अपग्रेड और मर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी के तहत नेशनल पोर्टल पर एपीआइ शिफ्टिंग का काम होने के कारण आयुष्मान पोर्टल के साथ पुराना डेटा लिंक नहीं हो पा रहा है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि यह एक तकनीकी सुधार कार्य है, जो राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है।कार्य पूरा होते ही सेवाएं बहाल हो जाएंगी और कार्ड बनने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी। तब तक अस्पतालों को वैकल्पिक प्रारूप के तहत जानकारी प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विकल्प के अभाव में बढ़ी फजीहत

जिले में कुल आबादी का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 15 लाख लोग) आयुष्मान योजना के दायरे में आता है। ऐसे में अचानक आई इस तकनीकी रुकावट का कोई ठोस वैकल्पिक माध्यम तत्काल उपलब्ध न होने के कारण अफरा-तफरी का माहौल है।

जानकारों का कहना है कि जब तक सर्वर की यह समस्या पूरी तरह दूर नहीं होती, तब तक आम जनता की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। फिलहाल, स्वास्थ्य महकमा और संबंधित तकनीकी टीम इस समस्या को जल्द से जल्द दूर करने के प्रयास में जुटी हुई है।

कमजोर मरीजों को हो रही ज्यादा परेशानी

आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाने का सीधा असर आर्थिक रूप से ऐसे कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है, जिनका पहले से आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। जब वे इलाज कराने के लिए संबंधित अस्पताल पहुंच रहे हैं तो उसे बताया जा रहा है कि कार्ड अभी नहीं बन पाएगा। ऐसे में आयुष्मान से इलाज अभी संभव नहीं है। अभी इलाज कराना है तो नकद देना होगा अन्यथा कार्ड बनवाने तक रूकना पड़ेगा।

आयुष्मान कार्ड बनाने में उपयोग आने वाली पोर्टल बंद है, इसकी वजह से इन दिनों आयुष्मान भारत कार्ड नहीं बन पा रहा है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी और स्थिति सामान्य हो जाएगी।

 

डा़ शुभा गरेवाल, सीएमएचओ

 

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