राजनांदगांव : भविष्य में सड़क चौड़ीकरण प्रस्तावित, फिर भी 2.08 करोड़ की नाली निर्माण की तैयारी ?

कमल कुमार मेश्राम , राजनांदगांव। शहर में विकास कार्यों की प्राथमिकता और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला नगर पालिक निगम क्षेत्र के कन्हारपुरी से मोहरा बायपास तक प्रस्तावित नाला निर्माण से जुड़ा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस कार्य के लिए ₹208.32 लाख यानी करीब 2.08 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जिस मार्ग पर नाला निर्माण प्रस्तावित है, उसी सड़क के भविष्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा चौड़ीकरण किए जाने की योजना की बात सामने आ रही है। ऐसे में यदि सड़क का स्वरूप और सीमा भविष्य में बदलनी है, तो वर्तमान में करोड़ों रुपये खर्च कर नाली निर्माण कराने का औचित्य क्या है? क्या सड़क चौड़ीकरण के दौरान इस नाली को हटाने अथवा स्थानांतरित करने की नौबत आएगी?


  • 2.08 करोड़ रुपये का प्रावधान

सामने आए दस्तावेज में अधोसंरचना विकास योजनांतर्गत नगर पालिक निगम राजनांदगांव क्षेत्र के कन्हारपुरी से मोहरा बायपास तक नाला निर्माण कार्य के लिए ₹208.32 लाख की राशि निर्धारित किए जाने का उल्लेख है।

दस्तावेज के अनुसार 17 अगस्त 2026 को महापौर द्वारा सामान्य सभा की स्वीकृति की प्रत्याशा में जारी निविदा की पुष्टि/अनुमोदन से संबंधित विषय भी रखा गया है।यहीं से प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठता है कि सामान्य सभा की स्वीकृति की प्रत्याशा में निविदा प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई और इसकी प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रिया क्या रही?


  • सड़क चौड़ीकरण के बाद नाली का क्या होगा?

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण है। यदि संबंधित मार्ग का भविष्य में विस्तार होना है तो सड़क की चौड़ाई, सीमा, लेवल और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव स्वाभाविक है।ऐसी स्थिति में आज बनाई जाने वाली नाली को हटाना, स्थानांतरित करना या पुनर्निर्मित करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो सवाल यह है कि क्या वर्तमान में खर्च की जाने वाली ₹2.08 करोड़ की राशि से भी ज्यादा का एक हिस्सा भविष्य में दोबारा खर्च नहीं करना पड़ेगा?

सरकारी निर्माण कार्यों में केवल वर्तमान आवश्यकता को देखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह भी जरूरी है कि प्रस्तावित निर्माण भविष्य की स्वीकृत योजनाओं से टकराए नहीं और सरकारी धन का उपयोग दीर्घकालीन जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए।


  • निगम के वाहन और संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल

मामले में एक अन्य सवाल नगर निगम के वाहनों और संसाधनों के उपयोग को लेकर सामने आ रहा है। यदि वास्तव में निगम के वाहन अथवा मशीनरी नाला निर्माण के कार्य में उपयोग की जा रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि किस आदेश या अनुमति के तहत निगम के संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।निगम के वाहन और मशीनरी सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं। दूसरी ओर, यदि कार्य निविदा के माध्यम से किसी ठेकेदार को सौंपा गया है, तो आवश्यक मशीनरी और संसाधनों की जिम्मेदारी सामान्यतः निविदा की शर्तों से तय होती है।ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस कार्य की निविदा में नगर निगम के वाहनों या मशीनरी के उपयोग का कोई स्पष्ट प्रावधान है? यदि है, तो उसकी शर्तें क्या हैं? और यदि नहीं है, तो निगम के संसाधनों के उपयोग की अनुमति किस अधिकारी ने दी?


  • निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच समन्वय हुआ या नहीं?

पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच समन्वय से जुड़ा है।यदि संबंधित सड़क का भविष्य में चौड़ीकरण प्रस्तावित है और इसकी जानकारी विभागीय स्तर पर उपलब्ध थी, तो नाला निर्माण की निविदा जारी करने से पहले क्या लोक निर्माण विभाग से तकनीकी अथवा लिखित अभिमत लिया गया?क्या यह सुनिश्चित किया गया कि प्रस्तावित नाला भविष्य में सड़क चौड़ीकरण की सीमा में नहीं आएगा?

यदि दोनों विभागों के बीच आवश्यक समन्वय हुआ है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, यदि समन्वय नहीं हुआ है तो यह सरकारी धन के नियोजन और विभागीय तालमेल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।यदि किसी स्थान पर आज करोड़ों रुपये खर्च कर नाली बनाई जाती है और कुछ समय बाद सड़क चौड़ीकरण के दौरान उसी नाली को तोड़ना अथवा स्थानांतरित करना पड़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी

जनता के धन से होने वाले प्रत्येक निर्माण में यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि वह लंबे समय तक उपयोगी रहे और भविष्य की परियोजनाओं के कारण उसे अनावश्यक रूप से दोबारा न बनाना पड़े।

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