एफडीपी परियोजना की पहल: सोनहत में 90 मछली पालक किसानों को मिला उन्नत मत्स्य पालन का प्रशिक्षण

124 डबरियों के बेहतर उपयोग, वैज्ञानिक मछली पालन और जल प्रबंधन पर जोर; किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

कोरिया। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से वाटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (WOT) एवं एचडीएफसी बैंक परिवर्तन की एफडीपी (फोकस्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम) परियोजना के अंतर्गत विकासखंड सोनहत के ग्राम सुंदरपुर में एक दिवसीय उन्नत मछली पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मत्स्य पालन विभाग सोनहत के संयुक्त अभिसरण से आयोजित इस कार्यक्रम में 90 मछली पालक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन, जल प्रबंधन और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी दी गई।

परियोजना के अंतर्गत विकासखंड के 35 गांवों में निर्मित 124 डबरियों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को मछली पालन को एक लाभकारी एवं टिकाऊ आजीविका के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना और उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना रहा।

 

वैज्ञानिक मछली पालन से उत्पादन बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम में मत्स्य निरीक्षक राजेश जाटवर ने किसानों को मछली पालन की विभिन्न तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मछली के बीज डालने से पहले पानी का उचित उपचार करना और सही तरीके से बीज का संचयन करना बेहद जरूरी है। इससे मछलियों की मृत्यु दर कम करने, बेहतर वृद्धि सुनिश्चित करने और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।

उन्होंने किसानों को जल उपचार, मछली के बीज का उचित चयन, सही मात्रा में बीज संचयन, आहार एवं पोषण प्रबंधन तथा मछलियों में होने वाली बीमारियों की पहचान और उनसे बचाव के उपायों के बारे में बिंदुवार जानकारी दी। साथ ही किसानों को सलाह दी गई कि वे मछली पालन के दौरान वैज्ञानिक मानकों का पालन करें, ताकि उपलब्ध डबरियों से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

एनएफडीपी पोर्टल से पंजीयन की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया भी समझाई गई। कुछ किसानों को नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस पहल के जरिए किसानों को मत्स्य पालन से संबंधित विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा पात्रता के अनुसार उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही मछली बीज की खरीद पर मिलने वाली संभावित सब्सिडी एवं अन्य सहायता के संबंध में भी जानकारी दी गई।

 

खेतों में बनी डबरियां बनेंगी अतिरिक्त आय का माध्यम: विनायक शर्मा

वाटर संस्था के परियोजना प्रबंधक विनायक शर्मा ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने किसानों को परियोजना के माध्यम से उपलब्ध सहायता और वर्तमान में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि खेतों में निर्मित तालाबों और डबरियों का उचित प्रबंधन कर किसान मछली पालन को अपनी आय का अतिरिक्त स्रोत बना सकते हैं।

 

उन्होंने बताया कि किसानों की जानकारी और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें केवल सैद्धांतिक प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि फील्ड स्तर पर व्यावहारिक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। इससे किसान अपनी परिस्थितियों के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकेंगे और मछली पालन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर पाएंगे।

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सतत आजीविका और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

एफडीपी परियोजना किसानों एवं महिलाओं को नवाचार आधारित उद्यमों से जोड़ने, उनकी क्षमता विकसित करने और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और मैदानी मार्गदर्शन के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

मछली पालन जैसी गतिविधियां किसानों के लिए खेती के अतिरिक्त आय का अवसर बन सकती हैं। वहीं, उपलब्ध डबरियों का योजनाबद्ध उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, संसाधनों के सदुपयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। इस तरह की पहल किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

कार्यक्रम में मत्स्य निरीक्षक राजेश जाटवर, वाटर संस्था से परियोजना प्रबंधक विनायक शर्मा, सुधान सरकार, राजेंद्र सिंह, अंजू कुमार, सभी वसुंधरा सेवक तथा बड़ी संख्या में मछली पालन से जुड़े हितग्राही किसान उपस्थित रहे।

प्रमुख संदेश: वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर जल प्रबंधन और विभागीय योजनाओं की जानकारी के साथ सोनहत के किसान डबरियों को सतत आजीविका और अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बना सकते हैं।

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