मतदाता सूची पुनरीक्षण पर छत्तीसगढ़ में भारी सियासी बवाल: भाजपा और कांग्रेस में ‘वोट चोरी’ और ’25 लाख नामों’ को लेकर आर-पार

रायपुर।छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक तापमान पूरी तरह बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं, जिससे प्रदेश की चुनावी शुचिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। भाजपा जहां कांग्रेस पर मतदाताओं के बीच जानबूझकर भ्रम फैलाने और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस ने सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग और सत्ताधारी दल की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस चौंकाने वाले दावे से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान राज्य के लगभग 25 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। भूपेश बघेल ने इसे एक गंभीर लोकतांत्रिक संकट बताते हुए भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के पीछे क्या मापदंड अपनाए गए। कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और विपक्ष के समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है।

कांग्रेस के इन तीखे हमलों पर पलटवार करने में भाजपा ने भी देर नहीं की। भाजपा सांसद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संतोष पांडेय ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कटघरे में खड़ा किया। संतोष पांडेय ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ‘वोट चोरी’ का एक मनगढ़ंत मुद्दा करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि कांग्रेस का वोट शेयर लगातार गिर रहा है और अपनी जमीन खिसकती देख पार्टी के नेता अब मतदाताओं को भ्रमित करने की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस यह सब सिर्फ इसलिए कर रही है ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों के मन में अविश्वास पैदा किया जा सके। दोनों दलों के इन कड़े बयानों के बाद अब प्रदेश की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें निर्वाचन आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं।

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