गड्ढों में लटकता विकास: डोंगरगांव की नाली कथा
डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)।नगर पंचायत में विकास अब गड्ढों में लटक रहा है — सचमुच में! वार्ड क्रमांक 10 के वासी और सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चे रोज़ उस गड्ढे को प्रणाम करते हुए स्कूल पहुँचते हैं, जिसे नगर पंचायत ने दो महीने पहले “विकास” के नाम पर खोदकर छोड़ दिया है।
कहते हैं, यह गड्ढा एक नाली का भाग्य लेकर पैदा हुआ था — योजना थी कि यह नाली बनकर मुख्य नाले से मिल जाएगी, और क्षेत्र की निकासी समस्या को अलविदा कह दिया जाएगा। मगर, अफसोस! जैसे कई सपने अधूरे रह जाते हैं, वैसे ही यह गड्ढा भी अब सिर्फ एक गड्ढा बनकर रह गया है। मिट्टी सड़क पर बिखरी हुई है, फिसलन बढ़ रही है, और दुर्घटना कब होगी — यह सिर्फ भाग्य भरोसे है।
अब बात करें नगर पंचायत की, तो उनका मत है — “हम तो वहीं गिराएंगे नाली का पानी, जहाँ हमें जचता है!”
विद्यालय प्रबंधन ने समझदारी दिखाते हुए प्रस्ताव रखा कि मेन गेट के सामने बदबू और मच्छरों की बारात न लाएं, नाली को बगल वाली गली से घुमा कर मुख्य नाले में मिला दें। बात सीधी थी, पर नगर पंचायत को सीधी बातों से चिढ़ है शायद!
तो नतीजा? नाली का निर्माण अधूरा, गड्ढा खुला, मिट्टी फैली, बच्चे परेशान, और जनता फिर से सोच में — क्या वाकई ये विकास है?
वार्डवासी उम्मीद लगाए बैठे थे कि अबकी बार निकासी की समस्या खत्म होगी। लेकिन नगर पंचायत की हठधर्मिता ने फिर साबित कर दिया कि यहाँ जनहित से बड़ा “अपना हित” होता है। काम आधा करके छोड़ देना, लोगों की बात अनसुनी करना और छात्रहित को ठेंगा दिखाना — यही है डोंगरगांव स्टाइल।
अब जनता मांग कर रही है कि कम से कम बच्चों का भविष्य और स्वास्थ्य तो देख लो! नाली को सही दिशा दो और गड्ढे से बाहर निकल कर कुछ असल विकास दिखाओ।
वरना अगली बार कोई गड्ढा दिखे, तो समझ लेना — वहां भी विकास लटक रहा है।
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