Monday, February 23, 2026
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    रेत तस्करी का “सिस्टम” — अफसरों की मिलीभगत से डोंगरगांव में रोजाना 50 लाख की अवैध कमाई

     

    डोंगरगांव(दीपक अवस्थी)डोंगरगांव क्षेत्र में रेत तस्करी अब सिर्फ अपराध नहीं, एक संगठित कारोबार बन चुका है। प्रशासनिक अफसरों की शह और राजनीतिक विरोध को अनदेखा करते हुए प्रतिदिन लगभग पचास लाख की रेत नदियों से अवैध रूप से निकाली जा रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों द्वारा बार-बार आवाज़ उठाए जाने के बावजूद अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

     सूत्रों सी मिली जानकारी के अनुसार हर गाड़ी और घाट के पीछे अफसरों ने अपना 10हजार से लेकर ढाई लाख तक कमीशन तय है। जो आमजनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    *कार्रवाई के नाम पर दिखावा, असल में संरक्षण*

    कार्रवाई की खानापूर्ति के लिए कभी-कभार एक-दो ट्रकों को जब्त कर दिया जाता है, जिससे यह संदेश साफ है कि रेत माफिया को अंदरखाने से खुला संरक्षण मिल रहा है। यह “सिस्टम” इतनी मजबूती से जड़ा गया है कि अधिकारी इसकी तह तक अपनी पैठ बना चुके हैं।

    प्रधानमंत्री आवास योजना बनी तस्करी की ढाल

    राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को दी गई सीमित रेत निकासी की छूट का दुरुपयोग चरम पर है। छोटे वाहनों की जगह JCB और हाईवा ट्रकों से हजारों घनफीट रेत निकाल कर सड़कों पर खुलेआम परिवहन हो रहा है।

    *तस्करी के हॉटस्पॉट इलाके*

    करियाटोला, मटिया, साल्हे, आसरा, कोहका, बंदरकट्टा, रातापायली, अर्जुनी, कविराज टोला, घोरदा, मोखली, पागरी, साकरदाहरा, मनेरी, जामसरार, बरगांव, लक्ष्मण भरदा व अन्य

    *ऐसे समझे करोड़ों के अवैध कारोबार को*

    डोंगरगांव से लगी हुई करीब 20 घाट हैं जहां से हर रोजाना छोटी बड़ी 300 गाड़ियां निकलती है। 15हजार के औसत से करीब 45लाख की रोजाना अवैध रेत निकाली जा रही है।

    रेत की ब्लैकमार्केट रेट लिस्ट

    • 12 चक्का ट्रक (1000 फीट): ₹22,000

    • 10 चक्का ट्रक (600 फीट): ₹15,000

    • 6 चक्का ट्रक (300 फीट): ₹8,000

    • मज़दा (160 फीट): ₹4,000

    • छोटा ट्रैक्टर (150 फीट): ₹2,500

    *कागजों पर जिम्मेदार, जमीनी हकीकत में भ्रष्टाचार*

    अवैध परिवहन को रोकने की जिम्मेदारी ग्राम सचिव, पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और खनिज अधिकारी को सौंपी गई है, लेकिन असल में यह महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। शायद यही कारण है कि तस्कर बेखौफ हैं और जिम्मेदार अफसर मौन।

    *पर्यावरण पर मार: गिरता भूजल स्तर*

    नदियों की गहराई बढ़ने से जलस्तर में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। लगातार हो रही खुदाई ने पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल दिया है। आने वाले समय में यह पेयजल संकट और खेती के लिए एक बड़े खतरे का संकेत है।

    *“रेत का खेल” कब थमेगा?*

    प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक विरोध के बीच जनता की आवाज़ गुम होती जा रही है। अब सवाल यह है कि आखिर कब इस अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई होगी? या फिर डोंगरगांव की नदियां यूं ही सूखती रहेंगी और अफसर तस्करी की लहर में हाथ धोते रहेंगे?

     

     

    समय समय पर जांच होती रहती है। अब जल्द इस दिशा में उचित कार्यवाही की जाएगी।

    संजय अग्रवाल

    *कलेक्टर राजनांदगांव*

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