छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिद्ध, मोक्ष प्राप्ति की है मान्यता, सभी समाजों का साझा आस्था का केंद्र
डोंगरगांव( दीपक अवस्थी)।छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की नवनियुक्त अध्यक्ष नीलू शर्मा के पदभार ग्रहण करते ही राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। खासकर डोंगरगांव के समीप स्थित पवित्र स्थल सांकरदाहरा को लेकर क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह है। लोग आशान्वित हैं कि अब इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल को राज्य की धार्मिक धरोहर के रूप में आधिकारिक पहचान मिल सकती है।
प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक मान्यताओं से समृद्ध यह स्थल छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहलाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां स्नान करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हजारों की संख्या में लोग अस्थियों का विसर्जन करते आ रहे हैं। डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में इस क्षेत्र का विकास किया गया था लेकिन हाल के वर्षों में यह स्थल शासन-प्रशासन की अनदेखी का शिकार रहा है, जबकि हर साल हजारों श्रद्धालु यहां अपनी श्रद्धा व्यक्त करने पहुंचते हैं।
*सभी समाजों का साझा आस्था स्थल*
सांकरदाहरा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्वसमावेशी संस्कृति है। यहां किसी एक समाज या जाति की सीमाएं नहीं हैं। हर वर्ग और हर समुदाय के लोगों का मंदिर स्थापित है। लोग यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। स्थल पर स्थित प्राचीन मंदिर, जलधारा और साधु-संतों की तपोभूमि इसे एक विशिष्ट आध्यात्मिक केंद्र का दर्जा देते हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांकरदाहरा विकास समिति की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधी और सांकरदाहरा विकास समिति अध्यक्ष कमल नारायण वैष्णव और सचिव मान दास जेठू ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण गुप्ता से मिल पर क्षेत्र के विकास कि बात रखी। कहा कि पर्यटन बोर्ड से मांग है कि सांकरदाहरा को न केवल धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष ने आश्वासन देते हुए कहा कि नेतृत्व नीलू शर्मा जैसे संस्कृति प्रेमी व्यक्तित्व के हाथों में पर्यटन मंडल है, स्थानीय निवासियों को विश्वास है कि सांकरदाहरा को न केवल धार्मिक धरोहर का दर्जा मिलेगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं के साथ इसका समुचित विकास भी होगा। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र से रूबरू हो सकेंगी।
महाशिवरात्रि में लगता है भव्य मेला
सांकरदाहरा में महाशिवरात्रि पर भव्य मेला का आयोजन होता है इसमें तीन से चार लाख लोगों की उपस्थिति रहती है। यह आस्था का केंद्र समानता राजनांदगांव और मौला मानपुर जिले को सीधा प्रभावित करता है।
*इतिहास में भी दर्ज है सांकरदाहरा की महत्ता*
यह स्थल उस समय भी ऐतिहासिक चर्चा में आया था, जब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों का विसर्जन यहां किया गया था। छत्तीसगढ़ में गिनती के जिन स्थलों पर अटल जी की अस्थियां विसर्जित की गई थीं, उनमें सांकरदाहरा भी शामिल है। इससे इस स्थल का ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व और भी बढ़ गया है।
*छह माह में दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे*
सांकरदाहरा विकास समिति के आंकड़ों के अनुसार, बीते छह
माह दर्शनार्थियों की संख्या
अक्टूबर 2024 12590
नवंबर 2024 9435
दिसम्बर 2024 3490
जनवरी2025 4355
फरवरी 2025 150000(मेला के कारण)
मार्च 2025 4535
छह माह में तीन हजार लोगों ने किया अस्थि विसर्जन
सांकरदाहरा आस्था का केंद्र है त्रिवेणी संगम है। डॉ रमन सिंह जी के कार्यकाल में काफी विकास कार्य हुए हैं वर्तमान विष्णु देव सिंह की सरकार में मुझे जिम्मेदारी मिली है। पर्यटन की दृष्टि से अवलोकन कर सरकार का ध्यान आकर्षण करूंगा और इसे ऐतिहासिक धरोहर के रूप में जरूर शामिल करूंगा।
नीलू शर्मा, अध्यक्ष
पर्यटन मंडल, छत्तीसगढ़





