ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो चुका है। सूर्य की तीक्ष्ण किरणें केवल पृथ्वी को ही नहीं, शरीर को भी झुलसा रही हैं। बाहर की गर्मी तो दिखती है, पर शरीर के भीतर जो हो रहा है, वह अकसर हमें दिखता नहीं — और वही सबसे ज़्यादा असर करता है।
ये जो तेज़ गर्मी है, ये शरीर के भीतर जमा हुआ कफ सुखा देती है, और वायु को बढ़ा देती है। अब वायु बढ़ेगी तो क्या होगा? पेट में गैस, सिरदर्द, बदन टूटना, बेचैनी, थकावट — ये सब आम हो जाते हैं। मूत्र-संबंधी तकलीफें भी इसी समय ज़्यादा देखने को मिलती हैं।
अब इस समय शरीर को चाहिए – शीतलता और संतुलन, और हम दे रहे होते हैं – आइसक्रीम, फ्रोजन फूड, गरम खाने के साथ ठंडा पानी, और वो भी एसी में बैठकर!
तो इस ऋतु में क्या करना चाहिए?
सबसे पहले – जो नहीं करना है वो जानिए:
• बहुत नमक, मिर्च, और खट्टा – इनसे वायु और पित्त दोनों भड़कते हैं।
• मद्य (शराब) – गर्मी में ये शरीर को और सूखा देती है, थकान, चिड़चिड़ापन, पेशाब में जलन लाती है।
• गरिष्ठ भोजन – तला-भुना, भारी खाना इस मौसम में पचता नहीं, उल्टा गर्मी और अम्लपित्त को बढ़ाता है।
• गर्म भोजन के साथ ठंडा पानी – एकदम विरुद्ध है। इससे पाचन की अग्नि बुझती है, खाना सड़ने लगता है और शरीर में विष (आम) बनता है।
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अब बात करें – क्या खाना चाहिए?
इस मौसम का सीधा नियम है – हल्का खाओ, ठंडा सोचो, और शरीर को नमी दो।
• मधुर रस वाले पदार्थ – जैसे घी, केला, अंगूर (द्राक्षा), नारियल पानी, मिश्री, शहद, खजूर, श्रीखंड।
• द्रव और लघु आहार – खिचड़ी, मूंग की दाल, पतली रोटी, तोरी, लौकी, कुंदरू जैसी सब्ज़ियाँ।
• घरेलू ठंडे पेय –
• सत्तू + शीतल जल + थोड़ा घृत+ थोड़ा गुड या मिश्री
• पुदीना-मिश्री का शरबत
• कच्चे और भुने बेल का शरबत
• छाछ (षाडव), लस्सी (बहुत गाढ़ी नहीं)
अगर शरीर में गर्मी ज़्यादा हो रही हो, या पेशाब में जलन हो, तो पुनर्नवा का अर्क या स्वरस बहुत लाभ करता
एक खास बात – दिन में थोड़ी नींद?
हाँ, ग्रीष्म ऋतु एकमात्र ऐसी ऋतु है जिसमें दिन में थोड़ी देर सोना अच्छा माना गया है।
क्यों? क्योंकि शरीर से पानी और ऊर्जा दोनों निकलते रहते हैं। दोपहर की हल्की झपकी शरीर को फिर से भर देती है।
लेकिन ध्यान रहे — दो-तीन घंटे की नींद नहीं, बस 20-30 मिनट काफी है।
योग और प्राणायाम?
व्यायाम ज़रूर करें, पर हल्का रखें।
• त्रिकोणासन, अर्धचंद्रासन, जानु शीर्षासन, भुजंगासन, धनुरासन — ये गर्मी में भी सुरक्षित हैं।
• प्राणायाम में शीतली और शीतकारी – नाम के ही जैसे, असर भी ठंडक देने वाला।
अगर इस प्रचंड गर्मी में आप —-
आइसक्रीम, फ्रोजन योगर्ट, बर्गर, पिज़्ज़ा, कोल्ड कॉफ़ी और हाई-प्रोटीन डाइट ले रहे हैं बॉट देखिए ये क्या करेगा ।
• आइसक्रीम या फ्रोजन फूड – अलग से जीभ को छौंक सकते हैं पर भोजन के साथ ये छौंक लगायेंगे तो यह अग्नि को मन्द करेगी,तो आपका पाचन बिगड़ेगा ।
• बर्गर-पिज़्ज़ा जैसे भारी आहार – गर्मी में पचने मुश्किल, शरीर में ताप और विषाक्तता दोनों बढ़ाते हैं।
• कोल्ड कॉफ़ी – कैफीन + ठंडा = डिहाइड्रेशन + पाचन की रुकावट
• हाई प्रोटीन डाइट (जैसे हेवी शेक्स, रेड मीट) – गर्मी में पचती नहीं, उल्टा अम्लपित्त और थकावट देती है।
तो याद रखिए:
गर्मी से लड़ना नहीं है, उसके साथ चलना है।
इस मौसम में शरीर को ज़्यादा चीज़ों की ज़रूरत नहीं — बस सादा खाना, ठंडा पानी (पर समझदारी से), और थोड़ा अनुशासन।





