Wednesday, February 25, 2026
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    प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में बंद होगा 5डे वर्किंग सिस्टम!

    रायपुर।प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में कांग्रेस शासन में शुरू किए पांच दिवसीय कार्य सिस्टम को अब बंद करने का निर्णय लिया जा रहा है। फिलहाल इस पर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है। मंत्रालय अैर संचालनालय के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में 5डे वीक यान वर्किंग सिस्टम को बंद करने का निर्णय हो चुका है, लेकिन अभी इसे लागू नहीं किया गया है। क्योंकि अभी राज्य सरकार द्वारा सुशासन तिहार मनाया जा रहा है।

    ऐसे में यदि इस सिस्टम को लागू कर दिया तो कर्मचारियों में आक्रोश फैल जाएगा और धरना-प्रदर्शन-आंदोलन शुरू हो जाएगा। फिर दफ्तरों में काम भी बंद हो सकता है। ऐसे में लोगों की समस्याओं का निराकरण नहीं होगा। इससे सरकार के प्रति आम जनता में संदेश ठीक नहीं जाएगा। इसलिए इसे अभी सुशासन तिहार तक रोककर रखा गया है। बताया जाता है कि राज्य शासन यह निर्णय आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायत मिलने के बाद ही ले रहा है।

    इसलिए लिया जा रहा निर्णय

    पांच दिवसीय कार्य का सिस्टम लागू होने पर कर्मचारियों-अधिकारियों को सुबह 10 तक हर हाल में दफ्तर आना है और शाम साढ़े पांच बजे तक काम करना है। लेकिन अधिकांश कार्यालयों में कुछेक की कर्मचारी ईमानदारी से सुबह 10 दफ्तर आते हैं और शाम साढ़े पांच बजे दफ्तर से निकलते हैं। ज्यादातर कर्मचारी अधिकारी सुबह 11 से 11.30 बजे तक दफ्तर आते हैं और समय से पहले ही निकलने लगते हैं। इससे काम प्रभावित होता है।

    किसी सप्ताह में 3 से 4 दिन तक अवकाश

    सप्ताह में दो दिन शनिवार और रविवार को अवकाश तो रहता है। इसी के साथ किसी सप्ताह शु्क्रवार या सोमवार को तीज-त्योहार, जयंती या कोई अन्य सरकारी अवकाश पड़ जाता है तो कर्मचारियों-अधिकारियों की बल्ले-बल्ले हो जाती है। एक साथ तीन से चार दिन तक अवकाश पड़ जाता है। बमुश्किल चार दिन ही सरकारी दफ्तरों में कामकाज हो पाता है।

    मुख्यमंत्री भी चेता चुके हैं अफसरों को

    बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी कर्मचारियों और अधिकारियों के दफ्तर लेट से आने को लेकर चेता चुके हैं। मंत्रालय में समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अफसरों से कहा था, पांच दिन ही काम करने होते हैं, उसमें लेटलतीफी आना शोभा नहीं देता है। इसी तरह से कामकाज का ढर्रा रहा तो कड़ा निर्णय लेने पड़ सकते हैं। सचेत हो जाइए।

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