कोरबा। कोरबा जिले के मदनपुर गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब ग्रामीणों के घर में अचानक एक विशाल किंग कोबरा घुस आया। यह खबर पूरे इलाके में तेजी से फैल गई और लोग दहशत में अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। किंग कोबरा की मौजूदगी से गांव का माहौल भयभीत हो गया। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी (NGO) की मदद से करीब डेढ़ घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सांप को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
रेस्क्यू अभियान रहा चुनौतीपूर्ण
कोरबा के डीएफओ कुमार निशांत ने जानकारी दी कि किंग कोबरा जैसे विषधर और आक्रामक प्रजाति के सांप को पकड़ना आसान काम नहीं होता। यह दुनिया का सबसे लंबा विषधर सांप है और किसी भी वक्त हमलावर हो सकता है। उन्होंने बताया कि टीम को किंग कोबरा को थैले में डालने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का समय लग गया। इस दौरान सांप बार-बार फुफकारता रहा और अपना रौद्र रूप दिखाता रहा। ग्रामीण सांस थामे इस पूरे अभियान को देखते रहे। रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी ने बताया कि किंग कोबरा को बड़ी सावधानी और धैर्य के साथ पकड़ा गया। अभियान में पासरखेत वन परिक्षेत्र अधिकारी देवदत्त खांडे, साकेत कुमार कौशिक, सिद्धांत जैन, बबलू मारुवा, कैलाश राठिया, संतोष कुमार यादव और खगेश यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों का सहयोग रहा।
प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया सांप
रेस्क्यू टीम ने सफलतापूर्वक किंग कोबरा को थैले में सुरक्षित करने के बाद उसे उसके प्राकृतिक जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया। डीएफओ निशांत ने बताया कि इस तरह के खतरनाक विषधर सांपों को पकड़कर किसी अन्य स्थान पर छोड़ना ही सबसे उचित तरीका है, क्योंकि वे पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं।
डीएफओ की अपील
कुमार निशांत ने आम नागरिकों से अपील की है कि किंग कोबरा या अन्य किसी भी सांप को नुकसान पहुंचाने या मारने की कोशिश न करें, क्योंकि यह अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि सांपों को देखकर घबराने के बजाय वन विभाग को तुरंत सूचना दें। इसके लिए विभाग ने एक टोल फ्री नंबर 8817534455 भी जारी किया है, जिस पर कॉल करके लोग तुरंत मदद मांग सकते हैं।
क्यों खास है किंग कोबरा?
किंग कोबरा दुनिया का सबसे लंबा विषधर सांप है, जिसकी लंबाई 20 फीट तक या इससे भी अधिक हो सकती है। इसका मुख्य आहार अन्य सांप होते हैं, यहां तक कि यह जहरीले सांपों को भी खा जाता है। इस वजह से यह जंगल में सांपों की संख्या नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि किंग कोबरा ही ऐसा सांप है जिसकी मादा अपने अंडों के लिए पत्तियों और टहनियों से घोंसला बनाती है। वह लगभग तीन महीने तक अपने अंडों और घोंसले की रक्षा करती है। प्रजनन के इस अनोखे व्यवहार के कारण इसे वैज्ञानिक और पारिस्थितिकी विशेषज्ञ काफी महत्वपूर्ण मानते हैं।
ग्रामीणों में दहशत, लेकिन राहत भी
गांव में किंग कोबरा की एंट्री से जहां लोग डरे और सहमे हुए थे, वहीं सफल रेस्क्यू के बाद उन्होंने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने वन विभाग और NGO की टीम का आभार जताया और कहा कि समय पर पहुंचकर अगर टीम सांप को पकड़ नहीं पाती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। विशेषज्ञों का कहना है कि किंग कोबरा जैसे विषधर जीव पर्यावरण और जंगल के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे सांपों और अन्य जीवों की जनसंख्या को नियंत्रित करके पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं। अगर इन्हें नुकसान पहुंचाया जाए तो प्राकृतिक चक्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।





