भानुप्रतापपुर। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के बड़ागांव से सामने आया है। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में पदस्थ डॉक्टर रत्नेश देशमुख रोज शराब के नशे में अस्पताल आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉक्टर का यही रवैया पिछले कई वर्षों से जारी है और मरीजों को इलाज की जगह अपमान और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक डॉक्टर रत्नेश देशमुख करीब पांच साल से बड़ागांव पीएचसी में पदस्थ हैं। इस दौरान वह ज्यादातर समय शराब के नशे में ही रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टर अस्पताल में आए मरीजों से अक्सर बदतमीजी से बात करते हैं और उनकी तकलीफों को गंभीरता से नहीं लेते। इलाज के नाम पर उपेक्षा और अपमान से ग्रामीण परेशान हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि “डॉक्टर साहब 24 घंटे नशे में रहते हैं। मरीज चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, वह शराब के नशे में ही जांच करते हैं और कई बार तो दवा तक सही ढंग से नहीं लिख पाते।” ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर का नशे में होना लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस लापरवाही की वजह से कई मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। गंभीर बीमारियों की स्थिति में लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है या फिर दूरस्थ इलाकों तक जाना पड़ता है। इस मामले में जब जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर.एस. ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि, “हमें इस मामले की शिकायत मिली है। डॉक्टर रत्नेश देशमुख के खिलाफ आई शिकायतों की जांच के लिए हमने टीम भेजी है। मामले की पड़ताल की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।” डॉ. ठाकुर ने स्पष्ट किया कि विभाग किसी भी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं से समझौता नहीं करेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे गांव के लोग आक्रोशित हैं और अब उन्होंने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं करता तो ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ सकता है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही, अनुपस्थिति शराबखोरी जैसी घटनाएं आम जनता के विश्वास को हिला रही हैं। खासकर बस्तर और उत्तर बस्तर जैसे इलाकों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं, वहां ऐसे मामले और भी गंभीर हो जाते हैं। गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की जगह यदि एक जिम्मेदार और संवेदनशील चिकित्सक की नियुक्ति की जाए तो पूरे क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। यह मामला न केवल प्रशासनिक गंभीरता का है बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इतने लंबे समय तक ऐसी शिकायतों को नजरअंदाज क्यों करते रहे।





