Thursday, February 26, 2026
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    शिक्षक दिवस विशेष : जिस स्कूल में सीखा था ककहरा, आज उसी की नींव कर रहे मजबूत

    स्वयं के व्यय और जनसहयोग से बदल दी प्राथमिक शाला की तस्वीर

    डोंगरगांव(दीपक अवस्थी)।अंग्रेजों के जमाने में बना और प्राथमिक शाला के नाम से प्रचलित डोंगरगांव का 150 साल पुराना स्कूल इन दिनों चर्चा में है। वजह हैं विजय जैन—जो कभी इसी स्कूल के छात्र थे और अब प्रधान पाठक पद पर रहते हुए बच्चों को वहीँ शिक्षा की मजबूत नींव दे रहे हैं।

    बचपन में इन्हीं कक्षाओं में बैठकर ककहरा सीखने वाले विजय जैन के लिए इस स्कूल से लगाव स्वाभाविक था। किस्मत ने करवट ली और अब वे इसी स्कूल में बतौर शिक्षक तैनात हैं। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपने प्रयासों और जनसहयोग से विद्यालय की कायाकल्प कर दी है।

    बुनियादी समस्याओं का समाधान

    • स्कूल में बोर था, लेकिन पंप न होने से पानी की समस्या थी। अब जनसहयोग से पंप लग गया।

    • कक्षाओं में पंखे और लाइट स्वयं के खर्च से लगाए।

    • जनसहयोग से परिसर में जलभराव की समस्या खत्म की।

    • मध्यान्ह भोजन के लिए बच्चों को थाली-कटोरी उपलब्ध कराई।

    • जनसहयोग से प्रार्थना सभागार भी तैयार कराया।

    इस स्कूल से ही रखी थी पढ़ाई की नींव

    1984 से 1989 तक विजय जैन ने इसी विद्यालय से पहली से पाँचवी तक पढ़ाई की। उसी दौर में शिक्षा की बुनियाद पड़ी और 2024 से वे यहीं प्रधान पाठक हैं।

     


    शिक्षक का संदेश

    “मैंने इसी स्कूल से ककहरा सीखा था। आज जब उसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने और उनकी मूलभूत सुविधाएँ सुधारने का अवसर मिला है तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मेरा मानना है कि यदि हम अपनी जड़ों को मजबूत करेंगे, तभी भविष्य की शाखाएँ हरी-भरी होंगी।”

    — विजय जैन, प्रधान पाठक


    फैक्ट फाइल


    स्कूल की उम्र: लगभग 150 वर्ष

    स्थापना: अंग्रेजों के जमाने में

    कक्षाएँ: पहली से पाँचवी तक

    पाठ्यक्रम: वर्तमान में सीबीएसई माध्यम

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