Saturday, February 28, 2026
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    घर में मातम था परिजन बिलख रहे थे, फिर भूत-भूत का मचा शोर

    कोरबा। जिले में अंतिम संस्कार के समय युवक जिंदा लौट आया। दरअसल, ससुराल गया बेटा 4 दिनों से लापता था। इसी दौरान पुलिस को डंगनिया नदी में एक युवक की लाश मिली। परिजनों ने टैटू और कपड़ों के आधार उसकी पहचान अपने लापता बेटे के रूप में की। परिजन शव को घर लेकर आए। उन्होंने अंतिम संस्कार की तैयारी तक कर ली थी, तभी बेटा दरवाजा खोलकर घर के अंदर घुसा। जिसे देख लोग भूत-भूत कहकर भागने लगे। बाद में पता चला कि परिजन किसी दूसरे युवक का शव घर ले आए थे। मामला बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र का है।  जानकारी के मुताबिक, गेवरा बस्ती में रहने वाला हरिओम वैष्णव (27) 5 सितंबर को अपने ससुराल दर्री आया था। पत्नी को मायके में छोड़कर वह अपने घर के लिए निकला, लेकिन वापस नहीं पहुंचा। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और दर्री थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस बीच सोमवार की दोपहर डंगनिया नदी में एक अज्ञात शव मिला। पानी में लंबे समय तक रहने के कारण शव की पहचान करना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, कद-काठी, रंग-रूप, जिंस और हाथ पर बने ‘आर’ अक्षर वाले टैटू के आधार पर परिजनों ने शव को हरिओम का मान लिया। पुलिस ने पंचनामा कर शव परिजनों को सौंप दिया। घर में शव आते ही मातम छा गया, महिलाएं-बच्चे फूट-फूटकर रोने लगे। रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार के लिए सूचना दी गई। मंगलवार सुबह अंतिम संस्कार की तैयारी थी। इसी बीच हरिओम वैष्णव जिंदा घर पहुंच गया। जिसे मृत मानकर परिजन रो रहे थे, जब वह सामने आया तो बस्ती में अफरा-तफरी मच गई।  कई लोग “भूत-भूत” चिल्लाकर इधर-उधर भागने लगे। बाद में जब सबको यकीन हुआ कि हरिओम जिंदा है, तब जाकर माहौल शांत हुआ। युवक ने बताया कि पारिवारिक विवाद के कारण वह बिना किसी को कुछ बताए दूसरे शहर चला गया था। दर्री सीएसपी विमल कुमार पाठक ने बताया कि नदी से मिली लाश को पहले हरिओम का शव मानकर कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके जीवित लौट आने के बाद स्पष्ट हुआ कि शव किसी और व्यक्ति का है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

     

     

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