डोंगरगांव(दीपक अवस्थी)।8 नवंबर — विश्व रेडियोग्राफी दिवस के मौके पर जहां दुनिया भर में रेडियोग्राफर स्वास्थ्य सेवाओं में अपने योगदान का जश्न मना रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के रेडियोग्राफर आज भी नाराज हैं। कारण साफ है — बीते 31 सालों से उनका रेडिएशन भत्ता सिर्फ 50 रुपये प्रति माह ही है। यह वही भत्ता है जो 1994 में तय हुआ था, जब उनका वेतनमान मात्र 975 से 1675 रुपये था। आज वेतन 50 हजार रुपये तक पहुँच गया, लेकिन रेडिएशन भत्ता अब भी वही — पचास रुपये!
खतरे के बीच सेवा, पर मुआवज़ा नगण्य
राजनांदगांव जिले में पदस्थ एक रेडियोग्राफर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हाल ही में उन्हें रेडिएशन के लगातार संपर्क में रहने के कारण उल्टी, कमजोरी और प्लेटलेट्स की कमी जैसी गंभीर परेशानी हुई, जिसके चलते उन्हें तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
महासमुंद की एक महिला रेडियोग्राफर ने बताया कि लंबे समय तक रेडिएशन के प्रभाव में काम करने से उनके स्वास्थ्य और मातृत्व पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “हम रोज़ाना मरीजों की जान बचाने के लिए रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं, लेकिन सरकार हमारी सेहत और सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेती।”
“दूसरों को ज्यादा, हमें अब भी वही 50 रुपये”
पटवारी को 250 रुपये, ड्राइवर को 250 रुपये, सहायक ग्रेड लिपिक को कम्प्यूटर भत्ता 500 रुपये मिल रहा है, जबकि रेडिएशन में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले रेडियोग्राफर को 1994 से आज तक केवल 50 रुपये ही दिया जा रहा है।” साहू का कहना है कि यह भत्ता मूल रूप से रेडिएशन डाइट के लिए तय किया गया था — ताकि रेडिएशन के दुष्प्रभाव से बचाव के लिए बेहतर आहार लिया जा सके। “आज 50 रुपये में तो आधा लीटर पेट्रोल भी नहीं आता,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।
भोज साहू, प्रांतीय संगठन सचिव, छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ
प्रदेश में 324 रेडियोग्राफर पदस्थ
छत्तीसगढ़ में फिलहाल 324 शासकीय रेडियोग्राफर कार्यरत हैं। ये सभी कई वर्षों से रेडिएशन भत्ते में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
क्यों मनाया जाता है विश्व रेडियोग्राफी दिवस
विश्व रेडियोग्राफी दिवस हर साल 8 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1895 में वैज्ञानिक विल्हेम कॉनराड रॉन्टगन ने एक्स-रे की खोज की थी, जिसने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी। यह दिवस उन रेडियोग्राफरों को समर्पित है जो मरीजों की सही निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अक्सर अपनी सेहत दांव पर लगाकर।
शासन के स्तर की बात है। इस पर निर्णय सरकार को ही निर्णय लेना होता है। कर्मचारी अपनी बात उनके समक्ष रख सकते हैं।
डॉ.प्रियंका शुक्ला आयुक्त एवं सह संचालक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, रायपुर





