Tuesday, February 24, 2026
More

    राजनांदगांव: नाबालिग की सोनोग्राफी, डिलीवरी और फिर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में आरडीसी हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. फुलेंद्र उइके ने सामाजिक लोगों के साथ अजाक्स थाने में शिकायत के साथ अपना पक्ष रखा

    • डॉ. फुलेंद्र उइके बोले- सोनोग्राफी के दिन ही दी जानकारी अब कटघरे में स्वास्थ्य विभाग, तीन महीने दबाया मामला
    • अजाक्स थाने में की शिकायत, बेवजह नाम घसीटा जा रहा, कार्रवाई की मांग

    राजनांदगांव ।नाबालिग की सोनोग्राफी, डिलीवरी और फिर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। आरडीसी हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ.फुलेंद्र उइके ने सामाजिक लोगों के साथ अजाक्स थाने में शिकायत के साथ अपना पक्ष भी रखा , उन्होंने कहा कि 11 सितंबर को सोनोग्राफी की गई, उसी दिन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को मामले की पूरी जानकारी दे दी गई। वहीं उन्हें बेवजह इस मामले में घसीटा जा रहा है, ऐसा भी आरोप उनके द्वारा लगाया गया। डॉ. उईके के बयान से स्वास्थ्य विभाग कटघरे में आ गया है क्योंकि सीएमएचओ डॉ. एनआर नवरतन ने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कह चुके हैं। वहीं सप्ताह भर पहले ही यानी जनवरी में मामले का पता चलना बताया। यानी पोर्टल में जानकारी अपलोड होने के तकरीबन तीन महीने तक विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं थी। इससे ही स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणली का अंदाजा लगाया जा सकता है। जबकि ऐसे गंभीर मामलों में तत्काल एक्शन लिया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा किया नहीं गया और जब मामला उजागर हुआ, पुलिस विभाग ने जांच शुरू की, तब स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच टीम बनाई। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और मामले को दबाने की बात को नकारा नहीं जा सकता है।

    जिस तरह से डॉ. उईके ने अपने बयान में बताया कि नाबालिग के गर्भ ठहरने जैसा मामला आता है तो उसकी जानकारी पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग को देना होता है। उन्होंने इसका पालन किया। यदि इसी नियम की बात की जाए तो डिलीवरी कृष्णा हास्पिटल में हुई है, संस्थान के द्वारा पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई यह बात पुलिस के आला अधिकारियों ने कही है कि उन्हें सूचित नहीं किया।

    Hot Topics

    Related Articles

    error: Content is protected !!