लंबित मामलों पर सख्ती, बीट सिस्टम और मुखबिर नेटवर्क पर खास फोकस
डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)डोंगरगांव थाना शुक्रवार को उस समय पूरी तरह “रिव्यू मोड” में नजर आया, जब पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा वार्षिक निरीक्षण पर पहुंचीं। निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लंबित प्रकरणों, अपराध नियंत्रण और जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की वास्तविक स्थिति की बारीकी से पड़ताल की गई।

एसपी ने सबसे पहले थाना परिसर, रिकॉर्ड रूम और रजिस्टरों की स्थिति देखी। साफ-सफाई और दस्तावेज संधारण को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि थाने की कार्यप्रणाली पारदर्शी और व्यवस्थित दिखनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने विवेचकों के साथ बैठकर लंबित अपराध, मर्ग और शिकायतों की एक-एक कर समीक्षा की। लंबित मामलों के शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि देरी से न सिर्फ पीड़ित पक्ष प्रभावित होता है, बल्कि पुलिस की छवि पर भी असर पड़ता है।
निरीक्षण का सबसे अहम बिंदु आसूचना तंत्र रहा। एसपी ने बीट अधिकारियों को सक्रियता बढ़ाने, निगरानीशुदा बदमाशों और संदिग्धों की नियमित जांच सुनिश्चित करने तथा विश्वसनीय मुखबिरों का नेटवर्क मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिए कि अपराध पर नियंत्रण केवल कागजी कार्रवाई से नहीं, बल्कि जमीनी सूचना तंत्र से संभव है।
थाना में दर्ज प्रत्येक रिपोर्ट पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई के निर्देश देते हुए एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आमजन की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए। निरीक्षण के दौरान चोरी के एक प्रकरण में सराहनीय कार्य के लिए आरक्षक हेमंत सूर्यवंशी को पुरस्कृत भी किया गया, जिससे स्टाफ का मनोबल बढ़ा।
इस दौरान अनुभागीय अधिकारी (पुलिस) डोंगरगांव मंजूलता बाज और थाना प्रभारी आशीर्वाद रहटगांवकर सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।





