डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)। शिवनाथ नदी के शांत किनारे बनी एक साधारण कुटिया इन दिनों आस्था का केंद्र बनी हुई है। यहां संत त्रिलोचन दास पिछले 23 वर्षों से तपस्या में लीन हैं। वर्ष 2003 में गुरुपूर्णिमा के दिन लिया गया “विश्व कल्याण” का संकल्प आज भी उतनी ही दृढ़ता से निभाया जा रहा है।
14 साल तक बिना नमक किया फलाहार
संत त्रिलोचन दास ने चैत रामनवमी 2003 से फलाहार का व्रत शुरू किया। वर्ष 2003 से 2007 तक उन्होंने पूर्णतः बिना नमक के आहार ग्रहण किया। उनका यह संकल्प 14 वर्षों तक जारी रहा और 2017 तक उन्होंने नमक का त्याग किया।
वर्तमान में वे सीमित मात्रा में सेंधा नमक और उबली हुई सब्जियां लेते हैं। उनका कहना है कि भोजन केवल शरीर को चलाने का माध्यम है, साधना का उद्देश्य नहीं।
दिन-रात भजन और विष्णु आराधना
शिवनाथ तट की कुटिया में उनकी दिनचर्या प्रभु स्मरण से शुरू होती है। भगवान विष्णु की आराधना, जप, ध्यान और भजन उनका नियमित क्रम है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार रात भर कुटिया से भजन-संध्या की ध्वनि सुनाई देती है।
नदी की लहरों और मंत्रोच्चार का संगम वहां एक अलग ही आध्यात्मिक वातावरण बनाता है।
हर वर्ष सवा लाख आहुतियों का यज्ञ
संत त्रिलोचन दास प्रतिवर्ष “विश्व कल्याण” के उद्देश्य से सवा लाख आहुतियों का यज्ञ करते हैं। इसमें आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होते हैं। यज्ञ का उद्देश्य मानवता की शांति, सद्भाव और पर्यावरण की शुद्धि बताया जाता है।
साधारण जीवन, गहरा प्रभाव
न कोई दिखावा, न प्रचार—संत त्रिलोचन दास की पहचान उनकी सादगी और निरंतर तपस्या है। 23 वर्षों से एक संकल्प पर टिके रहना ही उन्हें विशिष्ट बनाता है।
शिवनाथ तट की यह कुटिया अब कई लोगों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्थल बन चुकी है।
आश्रम में यह हो रहा है आयोजन
विशेष संगीतमय प्रस्तुतियां हुई
- 24 जनवरी – सत्यम् शिवम् सुन्दरम् मानस परिवार, भरदाकला (बालोद)
- 25 जनवरी – श्री सीताराम मानस परिवार, मुसराकला (डोंगरगढ़)
- 26 जनवरी – पुष्पांजली लोक भजन मानस परिवार, कन्हारपुरी
- 27 जनवरी – श्री नवदुर्गा मानस समिति, आमगांव
- 28 जनवरी – मोर मयारू मानस परिवार, गुदगुदा (धमतरी)
- 29 जनवरी – रंग छत्तीसा ग्रुप, राजनांदगांव
- 30 जनवरी – उमाशंकर मानस परिवार, दुर्ग
- 31 जनवरी – प्रभु के संग मानस एवं भजन संकीर्तन चला





