गरियाबंद (राजिम): छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम के त्रिवेणी संगम पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 अब वैश्विक आस्था के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस पावन मेले में केवल देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी विदेशी मेहमान सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति के दर्शन करने पहुँच रहे हैं। हाल ही में इटली से आए पर्यटकों के एक दल ने कुंभ के वैभव को देखकर अपनी गहरी खुशी जाहिर की है। 
प्रमुख आकर्षण और अनुभव
संतों का आशीर्वाद: विदेशी मेहमानों ने महानदी के तट पर लगे विभिन्न अखाड़ों और शिविरों में जाकर नागा साधुओं और संतों का आशीर्वाद लिया।
सनातन परंपरा से प्रभावित: पर्यटकों ने आयोजन की स्वच्छता, सुरक्षा और सुव्यवस्थित प्रबंधनों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा ने उन्हें अंदर से बदल दिया है।
भारत की आत्मा: इटली से आए मेहमानों ने मीडिया से चर्चा करते हुए भावुक होकर कहा— “यह भारत की आत्मा है। भारतीय आध्यात्म और संस्कृति की गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है”।
प्रशासनिक तैयारियां और सुशासन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस वर्ष के राजिम कुंभ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं:
स्वच्छता और सुरक्षा: मेला स्थल पर चौबीसों घंटे सफाई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
सांस्कृतिक संगम: स्थानीय कलाकारों और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है।
प्रतिबंध: श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेला क्षेत्र में मांस और मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
राजिम कुंभ कल्प 2026 न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह वसुधैव कुटुंबकम की भावना को भी चरितार्थ कर रहा है, जहाँ विदेशी मेहमान भारतीय दर्शन और ‘सनातन’ की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।



